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निरीक्षण में स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा, लेकिन अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच पर सवाल कायम

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वर्षों से सुविधाओं की कमी से जूझ रहे मरीज, आकांक्षी जिला कार्यक्रम की समीक्षा के बीच जमीनी हकीकत पर उठ रहे सवाल

गिरिडीह, संवाददाता। झारखंड के गिरिडीह जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार समीक्षा और निरीक्षण किए जा रहे हैं, लेकिन गिरिडीह सदर अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली कुछ जरूरी सुविधाओं को लेकर जमीनी स्तर पर सवाल अब भी बने हुए हैं। खासकर अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा को लेकर मरीजों और उनके परिजनों को होने वाली परेशानी का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है।

नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम एवं आकांक्षी प्रखंड रूपांतरण कार्यक्रम के तहत समाहरणालय सभागार में समीक्षा बैठक के बाद आकांक्षी जिला के केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी-सह-राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील कुमार वर्णवाल ने गिरिडीह सदर अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य संसाधनों, मूलभूत सुविधाओं, चिकित्सकीय सेवाओं तथा मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान अस्पताल के विभिन्न वार्डों का जायजा लिया गया। बेड की उपलब्धता एवं उपयोग, साफ-सफाई, पेयजल, दवा तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की जानकारी ली गई। अधिकारी ने मरीजों और उनके परिजनों से भी अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

स्वास्थ्य संकेतकों पर भी हुई समीक्षा

आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े विभिन्न निर्धारित संकेतकों की भी समीक्षा की गई। गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, संस्थागत प्रसव, बच्चों के पूर्ण टीकाकरण, कुपोषित बच्चों की पहचान एवं उपचार तथा विभिन्न स्वास्थ्य जांच की स्थिति की जानकारी ली गई।

सैम एवं मैम श्रेणी के कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान, आवश्यक उपचार और पोषण सेवाओं से जोड़ने के साथ नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा मधुमेह, रक्त शर्करा, रक्तचाप और उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियों की जांच को प्रभावी बनाने तथा अधिक से अधिक लोगों को जांच एवं उपचार की सुविधा से जोड़ने पर जोर दिया गया।

निरीक्षण और जमीनी समस्या के बीच अंतर पर सवाल

अस्पताल निरीक्षण में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया, लेकिन सवाल यह है कि क्या निरीक्षण के दौरान अस्पताल की उन सभी जरूरी सेवाओं की भी समीक्षा हुई, जिनकी कमी का खामियाजा मरीज वर्षों से भुगत रहे हैं?

स्थानीय स्तर पर अल्ट्रासाउंड जांच जैसी महत्वपूर्ण सुविधा को लेकर मरीजों को होने वाली परेशानी की चर्चा होती रही है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से संबंधित मरीजों के लिए समय पर जांच काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि अस्पताल में नियमित और सुचारु रूप से अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो मरीजों को बाहर निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।

यही वजह है कि निरीक्षण और समीक्षा बैठकों के साथ-साथ अस्पताल की वास्तविक स्थिति और मरीजों की रोजमर्रा की परेशानियों का भी नियमित मूल्यांकन जरूरी है। केवल उपलब्ध संसाधनों की सूची और आंकड़ों की समीक्षा के बजाय यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि मरीज को अस्पताल पहुंचने के बाद वास्तव में कौन-कौन सी सुविधाएं समय पर मिल रही हैं।

जवाबदेही के साथ हो नियमित अनुश्रवण

सुनील कुमार वर्णवाल ने भी अस्पताल आने वाले मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और आवश्यक सुविधाओं की नियमित निगरानी का निर्देश दिया। उन्होंने संसाधनों अथवा आधारभूत सुविधाओं की कमी को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

ऐसे में अब निगाह इस बात पर रहेगी कि निरीक्षण के बाद अल्ट्रासाउंड सहित अन्य आवश्यक जांच एवं उपचार सुविधाओं की जमीनी स्थिति में कितना सुधार होता है। स्वास्थ्य व्यवस्था की सफलता का वास्तविक पैमाना यही होगा कि मरीजों को सरकारी अस्पताल में आवश्यक जांच और उपचार के लिए अनावश्यक रूप से इधर-उधर भटकना न पड़े।

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