57 वर्षीय बिगन का शव लावारिस समझकर श्मशान पहुंचाया, परिजन पहुंचे तो हो चुका था अंतिम संस्कार; 30 वर्षीय अज्ञात शव मेडिकल कॉलेज में रखा मिला
बिहार के गया जिले में अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस से शवों की अदला-बदली का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक परिवार अपने 57 वर्षीय सदस्य बिगन रविदास के शव को लेने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा, लेकिन वहां उनका शव मौजूद नहीं था। खोजबीन में पता चला कि जिस शव को लावारिस समझकर विष्णुपद श्मशान घाट भेजा गया था, वह बिगन रविदास का ही था। परिजन जब तक श्मशान घाट पहुंचे, तब तक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और शव पूरी तरह सुरक्षित नहीं बच सका।
गया में सामने आया पूरा मामला
बिहार के गया जिले के गुरारू थाना क्षेत्र के बरमा गांव निवासी 57 वर्षीय बिगन रविदास शुक्रवार रात गुरारू-मथुरापुर स्टेट हाईवे-69 पर अज्ञात वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजन उन्हें इलाज के लिए अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां शनिवार को उनकी मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज थाना पुलिस ने बिगन रविदास के शव को पोस्टमार्टम के लिए एफएमटी विभाग को सौंपा था। इसी दौरान पुलिस के अनुसार, बुधवार को जीआरपी के माध्यम से करीब 30 वर्षीय एक अज्ञात शव पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज आया था। शनिवार को दोनों शव पोस्टमार्टम हाउस के बाहर रखे गए थे।
लावारिस शव की जगह बिगन रविदास का शव पहुंचा श्मशान
पुलिस के अनुसार, लावारिस शव के अंतिम संस्कार के लिए चयनित व्यक्ति को चौकीदार ने शव सौंपना था। इसी दौरान लावारिस शव की जगह बिगन रविदास का शव ठेले पर रखकर विष्णुपद श्मशान घाट ले जाया गया। वहां दाह संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसी बीच बिगन रविदास के परिजन अपना शव लेने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। शव नहीं मिलने पर खोजबीन शुरू हुई और पता चला कि बिगन का शव विष्णुपद श्मशान घाट पहुंच चुका है।
परिजन तत्काल श्मशान घाट पहुंचे और दाह संस्कार रुकवाने का प्रयास किया। लेकिन तब तक अंतिम संस्कार शुरू हो चुका था। जलती लकड़ियों को पानी डालकर बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन शव धीरे-धीरे पूरी तरह जल गया।
परिजनों ने मेडिकल कॉलेज थाना में किया हंगामा
घटना के बाद परिजन मेडिकल कॉलेज थाना पहुंचे और शवों की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। खोजबीन के बाद सामने आया कि बिगन रविदास का शव दाह संस्कार के लिए विष्णुपद श्मशान घाट भेज दिया गया था, जबकि करीब 30 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव पोस्टमार्टम के बाद मेडिकल कॉलेज में ही रखा हुआ था।
अधिकारियों ने क्या कहा?
एफएमटी विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार रंजन ने कहा कि मानवीय भूल के कारण पोस्टमार्टम हाउस से शव की अदला-बदली हुई है। जीआरपी गया के थानाध्यक्ष शिव कुमार यादव ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से रेल प्रशासन की ओर से कोई अज्ञात शव पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज को नहीं भेजा गया है।
मेडिकल कॉलेज थाना के थानाध्यक्ष सुदेश कुमार ने एफएमटी विभाग की लापरवाही के कारण शवों की अदला-बदली होने की बात कही। उन्होंने बताया कि बुधवार को रेल थाना से 30 वर्षीय अज्ञात युवक का शव आया था और शनिवार को उसका पोस्टमार्टम कराया गया। दोनों शव ढके होने के कारण पहचान में समस्या हुई।
देर रात तक कार्रवाई की मांग करते रहे परिजन
घटना के बाद शनिवार देर रात तक परिजन मेडिकल कॉलेज थाना में जमे रहे। उन्होंने मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। बिहार के गया जिले में सामने आई इस घटना ने पोस्टमार्टम हाउस में शवों की पहचान, रखरखाव और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परिवार के लिए अपनों की मौत का दुख पहले ही असहनीय था, लेकिन अंतिम विदाई के समय शव की अदला-बदली ने इस पीड़ा को और गहरा कर दिया।






















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