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आठ सूत्री मांगों को लेकर पंचायत सहायकों ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

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सम्मानजनक मानदेय, 70% आरक्षण, बीमा सुविधा और मॉनिटरिंग सेल गठन समेत कई मांगें उठाईं; समस्याओं के शीघ्र समाधान की अपील

न्यूज स्केल संवाददाता
रांची। झारखंड प्रदेश पंचायत सहायक संघ ने पंचायत सहायकों की विभिन्न लंबित समस्याओं के समाधान एवं आठ सूत्री मांगों को लेकर बुधवार मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रदीप कुमार के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में पंचायत सहायकों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य सरकार ग्राम पंचायतों को सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। पंचायत सहायक भी सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, लाभुकों का डाटाबेस तैयार करने, जागरूकता अभियान चलाने, सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित करने तथा योजनाओं के मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान और मूलभूत सुविधाएं अब तक उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।

संघ ने बताया कि वर्तमान में पंचायत सहायकों को मात्र ₹2,500 प्रोत्साहन राशि मिलती है, जिससे वर्तमान महंगाई के दौर में परिवार का भरण-पोषण करना अत्यंत कठिन हो गया है। आर्थिक तंगी के कारण पंचायत सहायकों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

संघ की प्रमुख मांगें

  • मुख्यमंत्री के साथ 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की वार्ता
  • पंचायत सहायकों के लिए सम्मानजनक मानदेय लागू किया जाए।
  • प्रत्येक वर्ष ग्रामसभा अनुमोदन की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
  • पंचायत सचिव की नियुक्ति में 70 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
  • मृत पंचायत सहायकों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति मिले।
  • नगर निगम एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में कार्यरत पंचायत सहायकों का समायोजन किया जाए।
  • पंचायत सहायकों को स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा का लाभ दिया जाए।
  • समस्याओं के समाधान के लिए राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग सेल का गठन किया जाए।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रदीप कुमार ने मुख्यमंत्री से पंचायत सहायकों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक पहल करती है तो राज्यभर के पंचायत सहायकों का मनोबल बढ़ेगा और वे ग्रामीण विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

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