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जर्जर पुलों पर दौड़ रहे ओवरलोड कोयला वाहन, बड़े हादसे का बढ़ा खतरा

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पूर्व मंत्री बोले— ‘अब चतरा की धरती पर खून की नदियां नहीं बहने देंगे’; वैकल्पिक मार्ग और पुलों की तकनीकी जांच की उठी मांग

चतरा। चतरा सदर प्रखंड अंतर्गत हेरू नदी से कटकमसांडी रेलवे साइडिंग तक करीब 12 पुल ऐसे हैं, जिनमें कई समय के साथ जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन पुलों पर प्रतिदिन क्षमता से अधिक ओवरलोड कोयला वाहनों का परिचालन होने से किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका गहरा गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुलों की तत्काल तकनीकी जांच कराकर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार हेरू नदी पर बना पुल अंग्रेजों के शासनकाल का है और अब काफी पुराना हो चुका है। इसके बावजूद इसी मार्ग से रोजाना भारी संख्या में कोयला लदे हाईवा वाहनों का आवागमन हो रहा है। लोगों का कहना है कि यदि इस पुल को कोई नुकसान पहुंचा तो आसपास के कई गांवों का संपर्क टूट जाएगा और पूरा इलाका टापू में तब्दील हो सकता है।

झारखंड सरकार के पूर्व श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने हजारीबाग जिले के कोयले का परिवहन चतरा की सार्वजनिक सड़कों से किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कोयला खनन शुरू होने के बाद से सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है और अब चतरा की धरती पर खून की नदियां नहीं बहने दी जाएंगी। उन्होंने सीसीएल से कोयला परिवहन के लिए शीघ्र वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि सार्वजनिक सड़कों से कोयला ढुलाई बंद नहीं हुई तो सीसीएल के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से जर्जर पुलों का तकनीकी निरीक्षण कराने तथा आम लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग भी की।

लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और बेगुनाह लोगों की मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में कई ट्रांसपोर्टर और वाहन मालिक चालकों पर कम समय में अधिक ट्रिप लगाने का दबाव बनाते हैं। इसके कारण तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और लगातार वाहन चलाने से चालक थकान का शिकार हो जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा सड़क पर चलने वाले आम लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मौत का यह सिलसिला कब थमेगा। क्या प्रशासन और संबंधित कंपनियां किसी और बड़े हादसे का इंतजार करेंगी, या फिर मानव जीवन को प्राथमिकता देते हुए ऐसा ठोस और स्थायी निर्णय लेंगी, जिससे चतरा की सड़कों पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर हमेशा के लिए रोक लग सके।

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