सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षक से खेल, स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री तक; जानिए परसही गांव के रहने वाले बैद्यनाथ राम का राजनीतिक सफर; सोमवार को खरीदेंगे नामांकन पत्र
न्यूज स्केल लाइव
रांची/लातेहार: झारखंड की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) केंद्रीय नेतृत्व ने लातेहार के विधायक, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता बैद्यनाथ राम को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है। लातेहार जिले के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी स्थानीय राजनेता को संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) भेजने की तैयारी की गई है।
आगामी सोमवार को बैद्यनाथ राम अपना नामांकन पत्र खरीदेंगे, जिसके साथ ही उनके राज्यसभा जाने की वैधानिक व औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस घोषणा के बाद से ही पूरे लातेहार जिले और झामुमो कार्यकर्ताओं में उत्साह और जश्न का माहौल है।
परसही गांव में जन्म, शिशु मंदिर में 3 साल तक की कप्तानी (शिक्षण)
बैद्यनाथ राम का जमीन से उठकर दिल्ली के संसद भवन तक पहुंचने का सफर बेहद प्रेरणादायी रहा है:
शुरुआती जीवन: बैद्यनाथ राम का जन्म वर्ष 1967 में लातेहार प्रखंड के एक छोटे से गांव परसही में हुआ था। वर्तमान में उनका परिवार लातेहार शहर के शहीद चौक स्थित धोबी मुहल्ला में निवास करता है।
शिक्षा: उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव से करने के बाद मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई बालक उच्च विद्यालय, लातेहार से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बनवारी साहू महाविद्यालय, लातेहार से राजनीति शास्त्र (Political Science) में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की।
शिक्षण कार्य: अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लातेहार शहर स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में लगभग तीन वर्षों तक आचार्य (शिक्षक) के रूप में कार्य किया और बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा दी।
साल 2000 में बदला जीवन का रुख, जदयू से बने पहले खेल मंत्री
वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर जब झारखंड राज्य का गठन हुआ, तो बैद्यनाथ राम ने शिक्षक की नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति के मैदान में कदम रखा।
पहली जीत (2000): झारखंड गठन के साथ ही वर्ष 2000 के पहले विधानसभा चुनाव में उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से भाग्य आजमाया और शानदार जीत दर्ज की।
मंत्रिमंडल में जगह: पहली बार विधायक बनते ही उनकी योग्यता को देखते हुए उन्हें सूबे का पहला खेल मंत्री बनाया गया। इसके बाद उन्होंने मद्य निषेध विभाग और स्वास्थ्य विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी बखूबी संभाली।
भाजपा में रहे शिक्षा मंत्री, उतार-चढ़ाव से भरा रहा राजनैतिक सफर
भाजपा का दामन (2005): वर्ष 2005 के चुनाव से ठीक पहले उन्होंने जदयू का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ली। भाजपा के टिकट पर उन्होंने दोबारा लातेहार से चुनाव जीता और इस बार अर्जुन मुंडा सरकार में उन्हें राज्य का शिक्षा मंत्री बनाया गया।
हार का स्वाद (2009): वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में एंटी-इंकंबेंसी के कारण उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रत्याशी प्रकाश राम के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
टिकट का संकट (2014-2019): वर्ष 2014 का विधानसभा चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा। वहीं, 2019 में वे भाजपा से प्रबल दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने ऐन वक्त पर प्रकाश राम को उम्मीदवार बना दिया। बगावत और हक की लड़ाई लड़ते हुए बैद्यनाथ राम ने तुरंत भाजपा का परित्याग किया और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का दामन थाम लिया।
2019 में झामुमो के तीर से फिर बने विधायक, अब संगठन ने दिया सबसे बड़ा इनाम
झामुमो में शामिल होने के बाद हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बैद्यनाथ राम ने 2019 का विधानसभा चुनाव लड़ा और प्रकाश राम को पटखनी देते हुए एक बार फिर विधायक चुने गए।
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना: लातेहार विधानसभा क्षेत्र का यह पुराना और अटूट रिकॉर्ड रहा है कि यहां की जनता ने आज तक किसी भी विधायक को लगातार दूसरी बार मौका नहीं दिया है। इसके बावजूद बैद्यनाथ राम ने अलग-अलग दलों में रहकर भी जनता के दिलों पर राज किया है। संगठन में उनकी वफादारी, प्रशासनिक अनुभव और लातेहार की जनता पर मजबूत पकड़ को देखते हुए ही झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन और केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा का टिकट देकर सबसे बड़ा राजनीतिक इनाम दिया है।
यदि चुनावी गणित के अनुसार उनका राज्यसभा में निर्वाचन तय होता है, तो वह लातेहार की मिट्टी से निकलकर देश की सबसे बड़ी पंचायत के उच्च सदन में बैठने वाले जिले के पहले माननीय प्रतिनिधि बनकर एक नया इतिहास रच देंगे।






















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