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कोल रोड विवाद: तीसरे दिन आंदोलनकारियों ने 5 जून का चक्का जाम लिया वापस; अब आमरण अनशन की दी चेतावनी

On: June 4, 2026 11:50 PM
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आरटीआई (RTI) से बड़ा खुलासा— सड़क निर्माण को लेकर अंचल कार्यालय के पास कोई सरकारी पत्र नहीं; 10 एकड़ गैरमजरूआ भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, आर-पार की जंग में जुटे ग्रामीण

न्यूज स्केल लाइव

टंडवा (चतरा): चतरा जिले के टंडवा प्रखंड अंतर्गत कबरा पंचायत क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला ढुलाई सड़क के विरोध में ग्रामीणों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भी वृंदा गांव के देवी मंडप के समीप पंचायत क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी रहा।

आंदोलन के तीसरे दिन ग्रामीणों ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए आगामी 5 जून को प्रस्तावित ‘महा चक्का जाम’ के कार्यक्रम को फिलहाल वापस ले लिया है। हालांकि, इसके बदले आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेताया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो वे चक्का जाम की जगह सीधे आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे।

आरटीआई से सनसनीखेज खुलासा— ‘अंचल के पास नहीं है कोई सरकारी अधिसूचना’

धरना का नेतृत्व कर रहे विनय बिहारी शरण ने धरना स्थल पर एक प्रेस वार्ता (पत्रकार वार्ता) आयोजित कर कंपनी और विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया:

  • विभाग से कोई सूचना नहीं: आंदोलनकारियों का कहना है कि आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, संबंधित ट्रांसपोर्टिंग सड़क निर्माण कार्य के विषय में टंडवा अंचल कार्यालय को विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक अधिसूचना (Official Notification) प्राप्त ही नहीं हुई है।

  • अंचल अधिकारी का बयान: ग्रामीणों के अनुसार, स्वयं टंडवा अंचल अधिकारी (CO) ने भी विभाग से इस सड़क निर्माण को लेकर किसी प्रकार की लिखित सूचना या आदेश प्राप्त नहीं होने की बात स्वीकार की है।

ग्रामीणों का तीखा सवाल: ग्रामीणों ने पुरजोर तरीके से सवाल उठाया कि जब तक सरकार की ओर से विधिवत भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की वैधानिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, तब तक जेआरएल (JRL) कंपनी कुछ रैयतों के साथ केवल निजी एग्रीमेंट (समझौते) के आधार पर इतनी बड़ी भारी ट्रांसपोर्टिंग सड़क का निर्माण कैसे शुरू कर सकती है?

10 एकड़ सरकारी गैरमजरूआ भूमि पर अवैध निर्माण का गंभीर आरोप

आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि इस प्रस्तावित हैवी ट्रांसपोर्टिंग कॉरिडोर (कोयला ढुलाई मार्ग) के दायरे में लगभग 10 एकड़ से अधिक सरकारी गैरमजरूआ भूमि आ रही है। नियमतः इस सरकारी भूमि के अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया को अभी तक पूरा ही नहीं किया गया है। ऐसे में बिना सरकारी अनुमति और बिना विभागीय लेटर के सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर हैवी मशीनों से किया जा रहा खुदाई और निर्माण कार्य पूरी तरह से गैरकानूनी और अवैध है।

हम विकास विरोधी नहीं, अधिकारों और पर्यावरण की रक्षा हमारा मकसद

विनय बिहारी शरण ने क्षेत्र में फैलाई जा रही दो पक्षों के बीच टकराव और विवाद की खबरों को पूरी तरह भ्रामक, मनगढ़ंत और साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण सड़क निर्माण या विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे बिना निर्धारित मानकों, बिना एनजीटी (NGT) के नियमों के पालन और आवश्यक सरकारी प्रक्रियाओं को ठेंगा दिखाकर किए जा रहे तानाशाही निर्माण का विरोध कर रहे हैं।

आंदोलन की मुख्य चार सूत्री मांगें और उद्देश्य:

  1. रैयतों के अधिकारों की रक्षा: बिना उचित प्रशासनिक प्रक्रिया के किसी की भूमि प्रभावित न हो।

  2. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण: क्षेत्र की जीवनदायिनी बड़की नदी और खड़ैया पुल की तकनीकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

  3. सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा: मार्ग में आने वाले पारंपरिक धार्मिक स्थलों, विद्यालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों पर पड़ने वाले धूल-धुआं और सुरक्षा के संभावित प्रभावों को लेकर कंपनी की जवाबदेही तय हो।

  4. एनजीटी के नियमों का पालन: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के प्रदूषण नियंत्रण मानकों और आधारभूत सुरक्षा व्यवस्था को धरातल पर लागू किया जाए।

आर-पार के मूड में सैकड़ों महिला-पुरुष, प्रशासन पर फोड़ा ठीकरा

धरना स्थल पर चिलचिलाती धूप के बावजूद डटे सैकड़ों महिला एवं पुरुष ग्रामीणों ने एक स्वर में हुंकार भरते हुए कहा कि जब तक उनकी चार सूत्री मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना अनवरत जारी रहेगा। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन, राज्य सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों (सांसद व विधायक) ने इस अवैध निर्माण पर रोक नहीं लगाई, तो ग्रामीण आमरण अनशन शुरू करने को मजबूर होंगे, जिससे होने वाली किसी भी अप्रिय घटना या जान-माल की क्षति की पूरी तकनीकी और नैतिक जिम्मेदारी चतरा जिला प्रशासन की होगी। वर्तमान में इस अल्टीमेटम के बाद टंडवा अंचल और पुलिस प्रशासन पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है।

कोल रोड विवाद का दूसरा दिन: वृंदा मोड़ पर डटे आंदोलनकारी, 5 जून को चक्का जाम का अल्टीमेटम; दूसरी तरफ समर्थन के लिए सजने लगा अलग पंडाल

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