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पीएचइडी की बड़ी लापरवाही: नल-जल योजना फेल, 90% जलमीनार खराब; भू-दाताओं ने बाउंड्री मार जलमीनार को बनाया निजी संपत्ति

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घरों में आज तक नहीं टपका पानी, खानापूर्ति कर संवेदकों ने निकाली राशि; विधायक प्रतिनिधि  बोले— भीषण गर्मी में त्रस्त है जनता, पीएचइडी कराए सर्वे

न्यूज स्केल लाइव

हंटरगंज (चतरा): चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत पाण्डेयपुरा मुख्य बाजार सहित ग्रामीण इलाकों के निवासी आज के इस आधुनिक दौर में भी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल-जल योजना’ के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं। ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि जब इस योजना की शुरुआत हुई थी, तो उम्मीद जगी थी कि अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और हर घर में शुद्ध जल निर्बाध मिलेगा।

लेकिन पीएचइडी (PHED) विभाग के अधिकारियों और संवेदकों की मिलीभगत व घोर भ्रष्टाचार के कारण आज पाण्डेयपुरा में लोगों के दरवाजों पर लगे नल सफेद हाथी साबित हो रहे हैं, जिनसे आज तक एक बूंद पानी नहीं टपका है।

घटिया सामग्री से हफ्ते भर में ढह गई व्यवस्था, सिर्फ खड़े हैं ‘शो-पीस’ मीनार

ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदकों (ठेकेदारों) द्वारा योजना के क्रियान्वयन में भारी अनियमितता बरती गई। कार्य पूर्ण होने का दावा कर कागजों पर सरकारी पैसे की निकासी तो कर ली गई, लेकिन धरातल पर सिर्फ खानापूर्ति हुई।

योजना में इतनी निम्न गुणवत्ता वाली सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया कि उद्घाटन के हफ्ते भर के भीतर ही पाइपलाइन और तकनीकी सिस्टम ने जवाब दे दिया। स्थिति यह है कि पूरे क्षेत्र में जगह-जगह जलमीनार (पानी टंकी) शो-पीस बनकर खड़े तो कर दिए गए हैं, पर उनमें जल का नामोनिशान तक नहीं है। कई जगहों पर बोरिंग फेल है, तो कहीं सोलर सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ा है।

अजीबोगरीब मामला: भू-दाताओं ने जलमीनार को चारदीवारी में घेरा, बनाया पर्सनल प्रॉपर्टी

हंटरगंज प्रखंड में योजना के फेल होने के पीछे एक बेहद हैरान करने वाला और गंभीर सामाजिक मुद्दा भी सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार:

  • निजी कार्यों में इस्तेमाल: कई जगहों पर जलमीनार स्थापित करने के लिए जमीन देने वाले भू-दाता अब इन सरकारी जलमीनारों को अपनी निजी संपत्ति समझने लगे हैं। वे आम जनता को पानी देने के बजाय उसका उपयोग अपने निजी व कृषि कार्यों में कर रहे हैं।

  • विरोध करने पर दबंगई: इस मुद्दे पर जब स्थानीय लोग आवाज उठाते हैं, तो भू-दाताओं द्वारा दो टुक जवाब दिया जाता है कि— “जब हमारी जमीन में मीनार लगा है, तो इस पर मालिकाना हक भी हमारा ही है।”

  • बाउंड्री वॉल के अंदर किया कैद: हद तो यह है कि कुछ रसूखदार भू-दाताओं ने सरकारी जलमीनार को अपने घर की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) के अंदर कर लिया है, ताकि कोई और वहां तक पहुंच न सके और पूर्ण रूप से उसका निजी इस्तेमाल किया जा सके। विचारणीय बात यह है कि आज तक विभाग द्वारा इस पर कभी कोई प्रशासनिक जांच या कार्रवाई नहीं की गई।

90 प्रतिशत जलमीनार पूरी तरह खराब, संवेदक बरत रहे लापरवाही: रौशन कुमार सिंह

इस गंभीर पेयजल संकट को लेकर सिमरिया विधायक प्रतिनिधि रौशन कुमार सिंह ने भी क्षेत्र निरीक्षण के बाद पीएचइडी विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने हंटरगंज प्रखंड में बदहाल पेयजल व्यवस्था, खराब पड़े जलमीनार एवं चापाकलों की अविलंब मरम्मत की मांग करते हुए कहा:

“क्षेत्र निरीक्षण के आधार पर यह साफ हो चुका है कि हंटरगंज प्रखंड क्षेत्र में स्थापित किए गए लगभग 90 प्रतिशत जलमीनार या तो तकनीकी खराबी के कारण पूरी तरह खराब पड़े हुए हैं या उन्हें आज तक चालू ही नहीं किया गया है। भीषण गर्मी के बीच आम जनता बूंद-बूंद पानी के लिए त्रस्त है, लेकिन पीएचइडी विभाग इस गंभीर समस्या पर कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।”

विधायक प्रतिनिधि ने आगे कहा कि प्रखंड में चापाकलों (हैंडपंप) की मरम्मत का कार्य भी कछुआ गति से चल रहा है। संवेदक द्वारा घोर लापरवाही बरतते हुए कार्य को समय पर पूरा नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण कई गांवों में त्राहिमाम की स्थिति है और लोग मीलों दूर से पानी ढोने को विवश हैं।

उच्च स्तरीय जांच और तत्काल सर्वे की मांग

पाण्डेयपुरा और हंटरगंज के प्रबुद्ध नागरिकों ने चतरा उपायुक्त से मांग की है कि इस महाघोटाले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि भ्रष्ट संवेदकों और मूकदर्शक बने इंजीनियरों पर कार्रवाई हो सके। वहीं, विधायक प्रतिनिधि ने विभाग को अल्टीमेटम दिया है कि वे तत्काल पूरे प्रखंड का सर्वे कराकर सभी बंद पड़े जलमीनारों और चापाकलों को युद्धस्तर पर दुरुस्त कराएं, अन्यथा जनता सड़क पर उतरने को बाध्य होगी।

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