Home बिहार झारखंड देश-विदेश मनोरंजन खेल क्राइम शिक्षा राजनीति हेल्थ राशिफल
---Advertisement---

NREP की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल: पत्थलगड़ा में ₹2.54 लाख की ढाई लाखिया सोलर लाइट बनी पहेली, एस्टीमेट को लेकर तकनीकी विशेषज्ञों ने खड़े किए कान

---Advertisement---
WhatsApp Group Join Now

सिमरिया विधायक ने नावाडीह दुर्गा मंडप के पास किया है उद्घाटन; बाजार दर से तीन गुना अधिक प्राक्कलित राशि तय करने पर कार्यपालक अभियंता घिरे, उच्च स्तरीय जांच की मांग

न्यूज स्केल लाइव

पत्थलगड़ा (चतरा): चतरा जिले के पत्थलगड़ा प्रखंड अंतर्गत नावाडीह दुर्गा मंडप के पास विधायक निधि योजना के तहत लगाया गया एक सोलर आधारित हाईमास्ट लाइट इन दिनों भारी विवादों के घेरे में है। सिमरिया विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय विधायक कुमार उज्जवल द्वारा लगभग दो लाख चौवन हजार रुपये की भारी-भरकम सरकारी राशि से इस लाइट का अधिष्ठापन कराकर उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन जैसे ही योजना की लागत और कार्यान्वयन एजेंसी का बोर्ड सार्वजनिक हुआ, स्थानीय जनता के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञों ने इसके प्राक्कलन (एस्टीमेट) को लेकर सीधे एन.आर.ई.पी. (NREP) चतरा की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

शिलालेख ने खोला राज: NREP चतरा ने तैयार किया ₹2,54,000 का भारी बजट

नावाडीह दुर्गा मंडप के पास लगे इस सोलर लाइट के फाउंडेशन ब्लॉक पर जो सरकारी शिलालेख (बोर्ड) लगाया गया है, उसने भ्रष्टाचार और ओवर-प्राइजिंग की आशंकाओं को हवा दे दी है। बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

NREP के तकनीकी एस्टीमेट पर उठे सवाल: 90 हजार की लाइट की कीमत 2.54 लाख क्यों?

योजना स्थल पर लगाई गई लाइट के भौतिक स्वरूप को देखने पर साफ पता चलता है कि इसमें एक सामान्य लोहे/जीआई (GI) के सिंगल पोल पर दो छोटे सोलर पैनल और चार एलईडी (LED) फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं।

विशेषज्ञों का दावा: बाजार दरों और सरकारी जेम (GeM) पोर्टल के तकनीकी जानकारों की मानें तो इस स्तर के एक सामान्य मिनी सोलर हाईमास्ट लाइट को पूरी तरह स्थापित करने का वास्तविक और अधिकतम खर्च ₹60,000 से ₹90,000 के बीच आता है। ऐसे में प्रबुद्ध नागरिक सीधे एन.आर.ई.पी. (NREP) के कार्यपालक अभियंता और कनीय अभियंतों से यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर किस तकनीकी मापदंड और सरकारी एस्टीमेट के तहत इस साधारण लाइट की कीमत ₹2.54 लाख तय कर दी गई? क्या जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसे को कागजों पर ओवर-प्राइस (बढ़ा-चढ़ाकर) दिखाकर ठिकाने लगाने की योजना थी?

ग्रामीण बोले— ‘ढाई लाख में रोशन हो जाता पूरा मोहल्ला, यहाँ सिर्फ एक पोल खड़ा किया’

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण और सुदूर इलाकों में रोशनी होना बेहद जरूरी है, और दुर्गा मंडप जैसे आस्था व सार्वजनिक समागम के स्थान पर लाइट लगाने का फैसला बिल्कुल सही है। लेकिन लाइट लगाने के पीछे विभाग की नीयत और उसकी लागत पूरी तरह से अनुचित, संदेहास्पद और बंदरबांट का साफ मामला प्रतीत होती है।

ग्रामीणों के अनुसार, ढाई लाख रुपये के भारी बजट में आधुनिक तकनीक के कई पोल लगाकर एक पूरे मोहल्ले को सोलर लाइट से जगमगाया जा सकता था, लेकिन यहाँ सिर्फ एक साधारण पोल खड़ा करके इतनी बड़ी रकम पास करा ली गई। धरातल पर दिखने वाले विकास और एन.आर.ई.पी. (NREP) की सरकारी फाइलों के बजट में यह अंतर सीधे तौर पर विभागीय भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।

चतरा उपायुक्त और सतर्कता विभाग से उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की मांग

यह पहली बार नहीं है जब चतरा जिले में एन.आर.ई.पी. या अन्य तकनीकी विभागों द्वारा विधायक फंड और सरकारी योजनाओं के छोटे कामों की कीमत कागजों पर लाखों में दिखाकर सरकारी राजस्व को क्षति पहुँचाने के आरोप लगे हों। नावाडीह का यह मामला इस बात का जीता-जागता सबूत बन गया है।

क्षेत्र के स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चतरा उपायुक्त (DC) रवि आनंद और राज्य सतर्कता विभाग (विजिलेंस) से इस पूरी योजना के फिजिकल वेरिफिकेशन के साथ-साथ तकनीकी प्राक्कलन (एस्टीमेट) की उच्च स्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग की है, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके कि आखिर इस ‘ढाई लाखिया’ सोलर लाइट का असली सच क्या है और इसमें किन-किन अधिकारियों की संलिप्तता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment