मशहूर पर्यावरणविद ने सरकार को दी कड़क नसीहत— “मैसेंजर को मत मारो, मैसेज को समझो”; बीजेपी नेता सुकांता मजूमदार का सनसनीखेज पलटवार— “संगठन के 49% फॉलोअर्स पाकिस्तान से हैं।”
देश के डिजिटल स्पेस से लेकर सत्ता के गलियारों तक इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janta Party) नाम का एक अनूठा और तीखा ट्रेंड जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। सोशल मीडिया के मीम पेजों से शुरू हुआ यह अभियान अब देश की मुख्यधारा की राजनीति में पूरी तरह पैठ बना चुका है, जिसपर सरकार और विपक्ष दोनों ओर से लगातार तीखे बयानों के तीर छोड़े जा रहे हैं।
इसी कड़ी में अब देश के मशहूर पर्यावरणविद, शिक्षा सुधारक और लद्दाख की आवाज कहे जाने वाले सोनम वांगचुक का नाम भी जुड़ गया है। वांगचुक ने युवाओं द्वारा चलाए जा रहे इस अनोखे डिजिटल आंदोलन को अपना खुला और मुकम्मल समर्थन दे दिया है।
“गुस्से को हिंसा के बजाय क्रिएटिविटी में बदल रहे युवा” : सोनम वांगचुक
आंदोलन को लेकर खुलकर अपनी राय रखते हुए सोनम वांगचुक ने युवाओं की इस पहल की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि युवाओं का यह तरीका किसी को डराने वाला नहीं, बल्कि व्यवस्था को समझाने वाला है।
वांगचुक ने इस डिजिटल कैंपेन के पक्ष में तर्क देते हुए कहा: “आज का युवा अपने भीतर के आक्रोश और गुस्से को सड़कों पर हिंसा में तब्दील करने के बजाय, बेहद क्रिएटिव (रचनात्मक) और व्यंग्यात्मक अंदाज में सामने ला रहा है. लोकतंत्र की सेहत के लिए यह एक बेहद सुखद और अच्छी बात है.”
इस दौरान उन्होंने बेहद मजाकिया लहजे में खुद को इस अभियान का ‘आनरेरी कॉकरोच’ (मानद कॉकरोच) भी घोषित कर दिया। हालांकि, जब मीडिया ने उनसे तीखा सवाल पूछा कि क्या वह औपचारिक रूप से इस आंदोलन के सदस्य बनेंगे? तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि वह इसके लिए तकनीकी रूप से योग्य नहीं हैं, क्योंकि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के दावों के उलट न तो वह बेरोजगार हैं और न ही आलसी। लेकिन उन्होंने दोटूक साफ किया कि वह युवाओं की इस भावना को गहराई से समझते हैं और उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।
सरकार को वांगचुक का सीधा संदेश: “मैसेंजर को मत मारो, मैसेज को समझो”
चमचमाती डिजिटल स्क्रीन के जरिए सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को भी एक कड़क और सीधा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि किसी भी जन-आंदोलन की आवाज को जबरन दबाने से मूल समस्या कभी खत्म नहीं होती।
उन्होंने आगे कहा: “मैसेंजर को मत मारो, बल्कि उसके पीछे छिपे मैसेज (संदेश) को समझो. सोशल मीडिया पर किए जा रहे व्यंग्य, मीम्स या क्रिएटिव पोस्ट लोकतंत्र का एक खूबसूरत हिस्सा हैं. इन्हें सत्ता द्वारा दुश्मनी या राष्ट्रद्रोह की नजर से कतई नहीं देखा जाना चाहिए.”
वांगचुक ने प्रेस को उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस प्रकार मुख्यधारा के अखबारों में कार्टूनिस्ट बड़े-बड़े राजनेताओं के कैरिकेचर (व्यंग्यचित्र) बनाते हैं और उसे अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा माना जाता है, ठीक उसी तरह सोशल मीडिया पर युवाओं द्वारा किया जा रहा यह डिजिटल व्यंग्य भी एक ‘लोकतांत्रिक फीडबैक’ की तरह देखा और स्वीकार किया जाना चाहिए।
नेपाल हिंसा का हवाला देकर दी बड़ी चेतावनी; डिजिटल सेंसरशिप पर उठाए सवाल
सोनम वांगचुक ने इस दौरान पड़ोसी देश नेपाल का उदाहरण देते हुए भारतीय नीति निर्माताओं को एक गंभीर चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि जब-जब किसी देश में लोगों की ऑनलाइन आवाज को दबाया जाता है, डिजिटल सेंसरशिप लगाई जाती है या इंटरनेट को बार-बार बंद किया जाता है, तब जनता का वह दबा हुआ आक्रोश अचानक सड़कों पर हिंसक रूप में उतर आता है।
उन्होंने आगाह करते हुए कहा:
“नेपाल में जो कुछ भी हिंसा हुई, वह अचानक नहीं भड़की थी; बल्कि वह लंबे समय से जनता के दबाए जा रहे गुस्से का ही विस्फोटक नतीजा थी. अगर हमारे देश में भी युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स बंद किए जाएंगे या उनकी डिजिटल अभिव्यक्ति पर ताला लगाने की कोशिश होगी, तो हालात कहीं भी और कभी भी बिगड़ सकते हैं.”
बीजेपी का बड़ा और सनसनीखेज दावा: “संगठन के 49% फॉलोअर्स पाकिस्तान से हैं”
इधर, सोनम वांगचुक के इस एंट्री के बाद पूरे विवाद ने भयंकर राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का रंग पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और सांसद सुकांता मजूमदार ने इस पूरे आंदोलन की टाइमिंग और मंशा पर बेहद संगीन और सनसनीखेज आरोप मढ़े हैं।
सुकांता मजूमदार ने दावा किया है कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और आईटी सेल की मॉनिटरिंग के दौरान ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के सोशल मीडिया हैंडल और अकाउंट्स पर बेहद संदिग्ध और राष्ट्रविरोधी गतिविधियां ट्रेस की गई हैं। बीजेपी नेता ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए सीधा आरोप लगाया:
“इस तथाकथित संगठन के करीब 49 प्रतिशत (49%) फॉलोअर्स सीधे तौर पर पाकिस्तान (Pakistan) से जुड़े हुए हैं, जबकि भारत से इसके केवल 9 प्रतिशत (9%) फॉलोअर्स ही हैं. इससे साफ जाहिर होता है कि युवाओं के नाम पर देश के भीतर भ्रम फैलाने के लिए इस पूरे डिजिटल सिंडिकेट की स्क्रिप्ट और फंडिंग विदेशी जमीन से की जा रही है.”
इस सनसनीखेज खुलासे और दावों के बाद अब सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाम ‘राष्ट्र सुरक्षा’ को लेकर बहस और ज्यादा कड़क व तेज हो गई है।






















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