नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीद नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत की। प्रधानमंत्री ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों को नमन किया। इस दौरान इंटर-सर्विसेज गार्ड्स ने ‘सलामी शस्त्र’ तथा इसके बाद ‘शोक शस्त्र’ की परंपराओं का पालन किया।
श्रद्धांजलि समारोह में जनरल अनिल चौहान, भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह, भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी तथा रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने डिजिटल नोटबुक में अपने विचार भी दर्ज किए।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा कि यह राष्ट्रीय पर्व नागरिकों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करे तथा विकसित भारत के संकल्प को और सुदृढ़ बनाए। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस हमारी आज़ादी, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का मजबूत प्रतीक है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
गौरतलब है कि इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि होंगे। परेड में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष, भारत की सैन्य शक्ति—जिसमें ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलें शामिल हैं—और 30 भव्य झांकियों के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई जाएगी।
पिछले वर्ष हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली गणतंत्र दिवस परेड है, जिसमें अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और 29 विमानों की भव्य फ्लाईपास्ट आकर्षण का केंद्र होगी। इसके साथ ही करीब 2,500 कलाकार ‘वंदे मातरम’ और आत्मनिर्भर भारत की भावना पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परेड देखने के लिए प्रधानमंत्री के रेडियो कार्यक्रम मन की बात के प्रतिभागी, कर्तव्य भवन के निर्माण में लगे श्रमिक, लखपति दीदी तथा रोजगार, नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लगभग 10,000 विशेष अतिथि आमंत्रित किए गए हैं।





















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