कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त ही शास्त्रसम्मत, दोपहर 1:51 बजे तक रहेगा शुभ समय; मुर्गा पर प्रस्थान को ज्योतिषाचार्य ने बताया अमंगलकारी
सिमरिया (चतरा)। सनातन धर्म में शक्ति उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्र की शुरुआत इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से होगी। क्षेत्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य रवीन्द्र प्रसाद ने वर्ष 2026 की आश्विन दुर्गा पूजा का विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण करते हुए बताया कि इस बार मां दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन शुभ एवं मंगलकारी है, जबकि प्रस्थान को चिंताजनक संकेत वाला माना गया है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार एक वर्ष में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें दो मुख्य और दो गुप्त नवरात्र माने जाते हैं। आश्विन शुक्ल पक्ष का शारदीय नवरात्र सर्वजन के लिए सुलभ और फलदायी माना गया है। उन्होंने श्रीदुर्गासप्तशती के 12वें अध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि शरत्काल में भगवती की वार्षिक महापूजा के दौरान माहात्म्य का भक्तिपूर्वक श्रवण करने से श्रद्धालु बाधाओं से मुक्त होकर धन-धान्य और सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।
अभिजीत मुहूर्त में ही कलश स्थापना
ज्योतिषाचार्य रवीन्द्र प्रसाद ने बताया कि 11 अक्टूबर को प्रतिपदा तिथि रात 8:37 बजे तक रहेगी। इस दिन चित्रा नक्षत्र रात 10:49 बजे तक तथा वैधृति योग रात 10:24 बजे तक रहेगा। उनके अनुसार शास्त्रीय मान्यता में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के दौरान कलश स्थापना वर्जित मानी गई है। ऐसे में चौघड़िया के आधार पर कलश स्थापना करना उचित नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि इस परिस्थिति में पूर्वाह्न 10:51 बजे से अपराह्न 1:51 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में ही कलश स्थापना करना शास्त्रसम्मत रहेगा। इसी अवधि में कलश स्थापना के साथ श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ प्रारंभ करने की बात कही गई है।
हाथी पर आगमन शुभ, मुर्गा पर प्रस्थान अमंगलकारी
श्री हृषिकेश पंचांग के आधार पर माता की सवारी नवरात्र के आरंभ और समापन के दिन के अनुसार निर्धारित होती है। इस बार नवरात्र का शुभारंभ रविवार को होने के कारण मां दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार हाथी पर माता का आगमन शुभ एवं सुवृष्टि कारक माना जाता है, जिससे अच्छी बारिश, बेहतर कृषि और जनजीवन में खुशहाली की मान्यता जुड़ी है। वहीं इस बार माता का मुर्गा पर प्रस्थान होने के कारण इसे अमंगलकारी संकेत माना गया है।




















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