निर्जला उपवास के बाद व्रती माताओं ने किया पारण, विभिन्न हिस्सों में सजे मेले
कान्हाचट्टी (चतरा, झारखंड)। चतरा जिले के विभिन्न हिस्सों में जीवित्पुत्रिका व्रत के शुभ अवसर पर शनिवार और रविवार को मेले और पारंपरिक नृत्य का आयोजन किया गया। संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला लोक आस्था का महापर्व जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) जिले भर में पूरी श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया।
निर्जला उपवास और विधि-विधान से पारण
व्रती माताओं ने शनिवार को निर्जला उपवास रखा और रविवार को विधि-विधान के साथ व्रत का पारण किया। परंपरा के अनुसार विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के साथ पूरे परिवार ने एक साथ भोजन किया। इस अवसर पर जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मेले और पारंपरिक झूमर नृत्य-संगीत का भव्य आयोजन देखने को मिला।
सिमरिया, सदर चतरा, इटखोरी और कान्हाचट्टी में सजे मेले
जिले के सिमरिया, सदर चतरा, इटखोरी और कान्हाचट्टी में मेले में दुकानें सजीं और बच्चों व महिलाओं में खासा उत्साह रहा। जिउतिया पर्व को लेकर जिले के कई गांवों और चौक-चौराहों पर पारंपरिक मेलों का आयोजन किया गया। मेले में मिट्टी के खिलौने, झूले और चाट-पकौड़े की दुकानों पर महिलाओं और बच्चों का तांता लगा रहा।
मेले का मुख्य आकर्षण रहा झूमर नृत्य
जिउतिया मेले का मुख्य आकर्षण पारंपरिक झूमर नृत्य रहा। जिले के ग्रामीण अंचलों में ढोल, ढाक और मांदर की थाप पर महिलाओं और स्थानीय कलाकारों ने देर शाम तक झूमर गीतों की प्रस्तुति दी। बुजुर्गों का कहना है कि झूमर की यह परंपरा हमारी लोक संस्कृति की पहचान है, जिसे आज की पीढ़ी भी बड़े उत्साह के साथ जीवित रखे हुए है।
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