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बाल विवाह मामले में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक समेत सभी 5 आरोपी बरी, एमपी-एमएलए कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में सुनाया फैसला

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करीब एक दशक पुराने मामले का न्यायिक निस्तारण, अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में रहा विफल

दुमका (झारखंड)। नाबालिग लड़की से बेटे की शादी कराने के मामले में झारखंड के दुमका स्थित एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक ताला मरांडी, उनके बेटे मुन्ना मरांडी और लड़की के पिता भगन बास्की समेत 5 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश मोहित चौधरी ने मामले की सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।

27 फरवरी 2016 का है मामला

मामला 27 फरवरी 2016 का है, जब ताला मरांडी झारखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। आरोप था कि उनके बेटे मुन्ना मरांडी की शादी एक नाबालिग लड़की से कराई गई थी। शादी के लिए आमंत्रण कार्ड छपवाए जाने और इसमें राजनेताओं तथा अधिकारियों के शामिल होने की बात भी सामने आई थी।

मामला तूल पकड़ने के बाद बोआरीजोर, गोड्डा के तत्कालीन बीडीओ सह बाल विवाह निषेध पदाधिकारी विजय कुमार मरांडी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 9, 10 और 11 के तहत ताला मरांडी, मुन्ना मरांडी, भगन बास्की, भीमा मरांडी और अनिल हेम्ब्रम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

राज्य की राजनीति में भी पड़ा था असर

बाल विवाह का मामला सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति में ताला मरांडी की भूमिका भी प्रभावित हुई थी। उन्होंने शुरुआत में आरोप साबित होने तक पद से इस्तीफा नहीं देने की बात कही थी, लेकिन अगस्त 2016 में उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। मंगलवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सभी 5 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

इस मामले के बाद वर्ष 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ताला मरांडी को टिकट नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने भाजपा छोड़कर आजसू पार्टी का दामन थामा और बोरियो विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में वह भाजपा में वापस लौटे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें राजमहल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

अप्रैल 2025 में ताला मरांडी ने भाजपा से इस्तीफा देकर झारखंड मुक्ति मोर्चा का दामन थाम लिया। मंगलवार को अदालत के फैसले के साथ करीब एक दशक पुराने इस मामले का न्यायिक स्तर पर निस्तारण हो गया। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए और सभी 5 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

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