डीबीएम-बीसी की मोटाई, कम्पैक्शन और लेयर-वाइज जांच को लेकर आपत्तियां; रिटेनिंग वॉल ढहने और जलजमाव ने बढ़ाई चिंता
देवघर (झारखंड), न्यूज स्केल संवाददाता : झारखंड के देवघर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-114ए के देवघर-बासुकीनाथ खंड के निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। निर्माण से जुड़े एक जानकार ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर दावा किया है कि सड़क की विभिन्न परतों में निर्धारित कम्पैक्शन, लेयर-वाइज गुणवत्ता सत्यापन तथा डीबीएम और बीसी की निर्धारित मोटाई को लेकर कई तकनीकी आपत्तियां सामने आई हैं। हालांकि, इन दावों की अंतिम पुष्टि स्वतंत्र तकनीकी जांच और परीक्षण रिपोर्ट से ही हो सकेगी।
जानकार के अनुसार, कुछ स्थानों पर पेवमेंट की विभिन्न परतों को निर्धारित स्तर का कम्पैक्शन सुनिश्चित किए बिना आगे बढ़ाए जाने की आशंका जताई गई है। वहीं, कुछ हिस्सों में डीबीएम और बीसी की वास्तविक कम्पैक्टेड मोटाई स्वीकृत डिजाइन तथा तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं होने की बात भी सामने आई है।
सड़क की मजबूती पर उठे तकनीकी सवाल
तकनीकी रूप से डीबीएम और बीसी सड़क की ऊपरी संरचना के महत्वपूर्ण हिस्से माने जाते हैं। इनकी निर्धारित मोटाई और उचित कम्पैक्शन सड़क की मजबूती, भार वहन क्षमता, टिकाऊपन और सेवा अवधि के लिए अहम होते हैं। यदि निर्माण स्वीकृत डिजाइन और तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप नहीं किया गया हो, तो भविष्य में सड़क पर समय से पहले दरार, धंसाव या अन्य क्षति की संभावना बढ़ सकती है।
मामले में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या निर्माण के प्रत्येक चरण में निर्धारित गुणवत्ता जांच, आवश्यक परीक्षण और स्टेज-वाइज निरीक्षण की प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया। बड़े सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में प्रत्येक लेयर के निर्माण के बाद गुणवत्ता सत्यापन और निर्धारित परीक्षण को महत्वपूर्ण माना जाता है।
रिटेनिंग वॉल दूसरी बार ढहने से बढ़ी चिंता
इसी बीच, एनएच निर्माण से जुड़े कार्यों को लेकर मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र में भी सवाल उठे हैं। जानकारी के अनुसार, बीते रविवार अहले सुबह भोरा-जमुआ के समीप मेसनरी रिटेनिंग वॉल दूसरी बार ढह गई। इसके बाद मिट्टी और मलबा सड़क की ओर भरभरा कर गिर गया। बताया गया कि राहगीरों के आवागमन का रास्ता मलबे से प्रभावित हुआ और एक मकान भी इसकी चपेट में आ गया।
स्थानीय लोगों और राहगीरों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं से आवागमन करने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होते हैं।
अंडरपास में जल निकासी की व्यवस्था पर भी सवाल
एनएच के कुछ अंडरपास में जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई है। कुछ स्थानों पर जलजमाव की स्थिति देखे जाने से स्थानीय लोगों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा कई जगहों पर सड़क की ऊपरी सतह उखड़ने के संकेत भी बताए जा रहे हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए सड़क निर्माण की लेयर-वाइज गुणवत्ता, डीबीएम और बीसी की वास्तविक मोटाई, कम्पैक्शन तथा निर्मित कंक्रीट कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग उठ रही है।
NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच की मांग
मामले में संबंधित परीक्षणों के लिए ऐसी NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से स्वतंत्र जांच कराने की आवश्यकता बताई जा रही है, जिसके मान्यता प्राप्त परीक्षण दायरे में संबंधित जांच शामिल हो। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि मौके पर किया गया निर्माण स्वीकृत ड्राइंग, डिजाइन, तकनीकी विनिर्देश और अनुबंधीय शर्तों के अनुरूप है या नहीं।
साथ ही, यदि जांच में किसी स्तर पर निर्धारित मानकों से विचलन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है। किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, अनुचित प्रभाव या मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि भी केवल स्वतंत्र जांच, संबंधित दस्तावेजों और तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही की जा सकती है।
एनएच-114ए के देवघर-बासुकीनाथ खंड में सड़क की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों से जुड़े इन सवालों के बीच अब स्वतंत्र तकनीकी जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों और स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप हुआ है या नहीं।
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