कोल इंडिया चेयरमैन समेत सीसीएल के आला अधिकारियों ने किया निरीक्षण, एनसीसी अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक; पेटी कांट्रेक्ट में ढुलाई क्षमता घटने की चर्चा
टंडवा (चतरा)। सीसीएल के टंडवा प्रखंड अंतर्गत आम्रपाली परियोजना में पिछले करीब 15 दिनों से निर्धारित कोयला उत्पादन और ढुलाई के ग्राफ में आई भारी गिरावट ने कोल इंडिया मुख्यालय से लेकर सीसीएल प्रबंधन तक की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को कोल इंडिया के चेयरमैन बी. साईराम, सीसीएल के सीएमडी निलेन्दु सिंह और डीटीओ चंद्रशेखर तिवारी ने परियोजना क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने शिवपुर रेलवे साइडिंग का भी जायजा लिया। इसके बाद जीएम, पीओ समेत एनसीसी के अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक की गई।
बताया गया कि वरीय अधिकारियों के दौरे से एक दिन पहले ही सीसीएल के सीएमडी निलेन्दु सिंह आम्रपाली परियोजना पहुंचकर उत्पादन और डिस्पैच से जुड़ी पूरी वस्तुस्थिति की जानकारी ले चुके थे। हालांकि, वरीय अधिकारियों के दौरे और बैठक को लेकर परियोजना प्रबंधन की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया था।
पेटी कांट्रेक्ट को लेकर उठ रहे सवाल
सूत्रों के अनुसार, आम्रपाली परियोजना में करीब आठ वर्षों के लिए खनन एवं परिवहन का लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का ठेका हासिल कर चुकी नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनसीसी) ने शिवपुर साइडिंग तक कोयले की ढुलाई का काम पेटी कांट्रेक्ट पर एवीएस इंटरप्राइजेज को दिया है। सूत्रों का दावा है कि एवीएस इंटरप्राइजेज निर्धारित क्षमता के अनुरूप कोयले की ढुलाई नहीं कर पा रही है।
दूसरी ओर, ओवरलोड ढुलाई के खिलाफ राज्य सरकार की सख्ती तथा ढुलाई में लगे वाहनों की संख्या नहीं बढ़ पाने के कारण कोयले के डिस्पैच में लगातार गिरावट की बात कही जा रही है। इससे परियोजना के निर्धारित उत्पादन एवं डिस्पैच लक्ष्य प्रभावित होने की चर्चा है।
लक्ष्य से पिछड़ने पर सीसीएल को वित्तीय नुकसान
सूत्रों के मुताबिक, पेटी कांट्रेक्ट के माध्यम से एवीएस इंटरप्राइजेज को ढुलाई का काम सौंपे जाने के बाद निर्धारित क्षमता के अनुरूप कोयला डिस्पैच नहीं हो पा रहा है। इसके कारण आम्रपाली परियोजना निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रही है और इसका आर्थिक असर सीसीएल पर पड़ने की बात कही जा रही है।
इधर, परियोजना में अचानक उत्पादन और ढुलाई के ग्राफ में आई गिरावट के बाद कोल इंडिया और सीसीएल के शीर्ष अधिकारियों का लगातार परियोजना का दौरा करना चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामला केवल अधिकारियों को निर्देश देने तक सीमित होता तो दिल्ली में बैठे अधिकारी फोन या ई-मेल के माध्यम से भी निर्देश जारी कर सकते थे। ऐसे में शीर्ष अधिकारियों के स्वयं परियोजना पहुंचने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, उत्पादन एवं डिस्पैच में गिरावट के वास्तविक कारण, पेटी कांट्रेक्ट की भूमिका तथा सीसीएल को हुए वित्तीय नुकसान की आधिकारिक पुष्टि परियोजना प्रबंधन की ओर से नहीं की गई है। मामले में सीसीएल और संबंधित कंपनियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।






















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