2.49 लाख की राशि से सड़क निर्माण का दावा, ग्रामीणों का आरोप- 90 हजार रुपये निकाले गए, काम नहीं हुआ
प्रतापपुर (चतरा)। चुनाव के दौरान विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों पर सवाल खड़े कर देती है। जोगियारा पंचायत के लिढ़िक गांव स्थित बढ़ईटोला में भोला यादव के घर से सुरेश मिस्त्री के घर तक बदहाल सड़क से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार आपसी सहयोग से निजी पैसे खर्च कर सड़क को चलने लायक बनाया।
ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के दिनों में यह सड़क पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती थी। इसी रास्ते से यूएमएस खरैया में पढ़ने वाले बच्चे प्रतिदिन स्कूल आते-जाते हैं। बच्चों को कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते से गुजरते देख ग्रामीणों ने सरकारी पहल का इंतजार करने के बजाय खुद सड़क की मरम्मत कराने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त सड़क का निर्माण करीब 2 लाख 49 हजार रुपये की राशि से कराया जाना था। उनका दावा है कि इस राशि में से करीब 90 हजार रुपये की निकासी कर ली गई, लेकिन सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इसकी वजह से उन्हें मजबूर होकर निजी खर्च से सड़क को चलने योग्य बनाना पड़ा। हालांकि, राशि की निकासी और कथित मिलीभगत संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब पंचायत स्तर पर विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है, तो फिर मूलभूत सुविधा के लिए आम लोगों को अपनी जेब से पैसा क्यों खर्च करना पड़ रहा है? उनका कहना है कि उन्होंने विकास की उम्मीद में मुखिया आशीष भारती को अपना प्रतिनिधि चुना था, लेकिन सड़क जैसी बुनियादी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीणों ने कहा कि निजी खर्च से की गई मरम्मत स्थायी समाधान नहीं है। उनकी मांग है कि सड़क का पक्का एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए, ताकि बरसात के मौसम में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को दोबारा कीचड़ व फिसलन की समस्या का सामना न करना पड़े। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने, सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत राशि एवं निकासी की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।





















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