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लोहरदगा में सर्पदंश का कहर: धान रोपनी, घास काटने और सिंचाई के दौरान तीन महिलाएं शिकार, सदर अस्पताल में भर्ती

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लोहरदगा में सर्पदंश का कहर: धान रोपनी, घास काटने और सिंचाई के दौरान तीन महिलाएं शिकार, सदर अस्पताल में भर्ती

 

 

​सिसई (गुमला) की महिला को भी बेहतर इलाज के लिए लोहरदगा लाया गया, परिजनों की मुस्तैदी से समय पर शुरू हुआ इलाज, ओझा-गुणी के चक्कर में न पड़कर सीधे अस्पताल पहुंचे ग्रामीण।

 

​लोहरदगा

मानसून की शुरुआत और खरीफ सीजन के जोर पकड़ते ही ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश (सांप काटने) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है। पिछले 24 घंटों के भीतर लोहरदगा और पड़ोसी जिले गुमला के सिसई में सांप काटने की तीन अलग-अलग घटनाएं सामने आईं। राहत की बात यह रही कि तीनों ही मामलों में परिजनों ने बिना वक्त गंवाए मुस्तैदी दिखाई और पीड़ितों को तत्काल सदर अस्पताल लोहरदगा में भर्ती कराया, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।

​पहली घटना लोहरदगा थाना क्षेत्र के भुजानिया गांव की है। यहाँ सिमोन कुजूर की 52 वर्षीय पत्नी ललिता कुजूर घर के पास मवेशियों के लिए घास काट रही थीं। इसी दौरान घास में छिपे जहरीले सांप ने उनके पैर में डस लिया। तबीयत बिगड़ती देख परिजन उन्हें तुरंत सदर अस्पताल लेकर पहुंचे।

 

​​दूसरी घटना भी लोहरदगा थाना क्षेत्र के भकसो कोयला टोली की है। यहाँ जतरु उराव की पत्नी सुमिता उरांव अपने खेत में धान की फसल के लिए पानी पटवन (सिंचाई) कर रही थीं। पानी और कीचड़ के बीच छिपे सांप पर नजर न पड़ने के कारण सांप ने उन्हें काट लिया। चीख-पुकार सुनकर दौड़े परिजनों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

​तीसरी घटना गुमला जिले के सिसई थाना क्षेत्र अंतर्गत दही दोन गांव की है। यहाँ बलवीर यादव की 32 वर्षीय पत्नी आशा देवी खेत में अन्य महिलाओं के साथ धान की रोपनी कर रही थीं। इसी क्रम में वह सर्पदंश का शिकार हो गईं। सिसई से नजदीक होने और बेहतर चिकित्सा सुविधा की उम्मीद में परिजन उन्हें लेकर सीधे सदर अस्पताल लोहरदगा पहुंचे, जहां उनका उपचार चल रहा है।

​सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि तीनों ही मामलों में मरीजों की स्थिति नियंत्रण में है। सबसे अच्छी बात यह रही कि ग्रामीण इस बार झाड़-फूंक या ओझा-गुणी के चक्कर में नहीं पड़े। सर्पदंश के बाद का पहला घंटा (गोल्डन ऑवर) बेहद कीमती होता है। समय पर अस्पताल आने के कारण तीनों महिलाओं को तुरंत एंटी-स्नेक वेनम (ASV) का डोज दे दिया गया, जिससे जहर शरीर में ज्यादा फैल नहीं सका।

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