सिदो-कान्हू उद्यान विधायक कल्पना सोरेन के साथ पहुंचे सीएम, अमर वीर सपूतों की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण; बोले— शोषण के खिलाफ बुझती नहीं क्रांति की चिंगारी
न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने मंगलवार को ऐतिहासिक ‘हूल दिवस’ के पावन अवसर पर मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर हूल विद्रोह के महानायक, अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। दोनों नेताओं ने अमर शहीदों के चरणों में पुष्प अर्पित कर उन्हें संपूर्ण राज्यवासियों की ओर से भावपूर्ण और सादर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस गौरवशाली अवसर पर उद्यान परिसर में उपस्थित भारी जनसमूह और पारंपरिक लोक कलाकारों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज का दिन भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम और ऐतिहासिक दिवस है, जब जल-जंगल-जमीन और जलते आत्मसम्मान की रक्षा के लिए विदेशी हुकूमत और उनके पोषित शोषकों के विरूद्ध पहली जबरदस्त शंखनाद की गई थी।
“परिणाम की परवाह किए बिना फूलो-झानो और चांद-भैरव ने फूंका था बिगुल”
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ हुए देश के पहले संगठित जन-विद्रोह को याद करते हुए कहा:
“एक ऐसा दौर था, जब देश में ब्रिटिश राज और सामंतों के शोषण चक्र से बाहर निकलने का किसी को कोई रास्ता या उम्मीद नहीं दिख रही थी। उस घनघोर अंधकार के समय हमारे आदिवासी समाज के पराक्रमी वीरों ने शोषण के विरुद्ध अग्रिम मोर्चा खोला। इसका अंतिम परिणाम क्या होगा— मौत मिलेगी या विजय, इसकी लेशमात्र भी चिंता किए बगैर हूल क्रांति के अमर नायक सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और अदम्य साहस की प्रतीक वीरांगना फूलो-झानो ने जन-जन के हक के लिए उलगुलान का बिगुल फूंक दिया था।”
मुख्यमंत्री ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को जोड़ते हुए आगे कहा कि इतिहास गवाह है, दुनिया में कहीं भी क्रांति या संघर्ष हमेशा दबे-कुचले, शोषित और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा और उनके प्रतिरोध से ही धरातल पर शुरू होता है। आज हमें अपने इन महान पूर्वजों और वीर सपूतों के शौर्य पर असीम गर्व है।
“क्रांति की आग कभी बुझती नहीं”, दिल्ली के राजघाट और इंडिया गेट का दिया उदाहरण
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने वैचारिक रूप से दृढ़ता प्रकट करते हुए कहा कि हक और अधिकारों के लिए सुलगी क्रांति की आग कभी बुझती नहीं है और न ही इसे किसी दमनकारी नीति से बुझाया जा सकता है। क्रांति की चिंगारी सदैव समाज के भीतर जीवित रहती है।
उन्होंने देश के गौरवमयी स्मारकों का जीवंत उदाहरण देते हुए कहा कि देश में कई ऐसी जगहें हैं जहाँ आज भी शहीदों की याद में अखंड दीप निरंतर प्रज्वलित रहता है, जैसे देश की राजधानी दिल्ली का राजघाट और इंडिया गेट। ठीक उसी तरह हमारे झारखंड के वीर सपूतों का बलिदान भी राज्य की सवा तीन करोड़ जनता के दिलों में मशाल बनकर सदैव जलता रहेगा। इस पावन वीर भूमि का गौरवशाली इतिहास युगों-युगों तक स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।
हूल दिवस राजकीय समारोह 2026: एक नजर में
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│ मुख्य अतिथि/श्रद्धांजलि कर्ता │ 1. हेमंत सोरेन (माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड)│
│ │ 2. श्रीमती कल्पना सोरेन (माननीय विधायक) │
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│ ऐतिहासिक मुख्य अवसर │ 'हूल दिवस' (30 जून) की पावन स्मृति │
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│ मुख्य आयोजन स्थल │ सिदो-कान्हू उद्यान, मोरहाबादी, रांची │
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│ मुख्य वैचारिक संदेश │ शोषकों के खिलाफ जलती रहेगी क्रांति की चिंगारी│
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महापुरुषों के आदर्शों पर चलने का लिया सामूहिक संकल्प
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह हमारे अमर वीर सपूतों की शहादत और अदम्य साहस की ही देन है कि आज पूरे देश-दुनिया में झारखंड को गर्व से “वीरों की पावन धरती” कहा जाता है। राज्य सरकार वर्षभर महापुरुषों की जयंती और शहादत दिवसों पर उन्हें नमन करती है। ये केवल आयोजन नहीं हैं, बल्कि ये वे पवित्र अवसर हैं जब हम सभी लोग सामूहिक रूप से राज्य के विकास और संरक्षण के लिए इन महापुरुषों के दिखाए गए न्यायपूर्ण आदर्शों पर चलने की प्रतिज्ञा दोहराते हैं। यह वीर सपूत देश, समाज और आने वाली नौजवान पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
























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