झारखंड का ‘खजुराहो’ बना इटखोरी! बामणी तालाब से मिली पालकालीन अलौकिक प्रतिमा, दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
न्यूज स्केल लाइव संवाददाता
चतरा/इटखोरी। चतरा जिले का सुप्रसिद्ध और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल इटखोरी प्रखंड एक बार फिर प्राचीन सभ्यता और पुरातात्विक धरोहरों को लेकर देश-दुनिया के नक्शे पर चर्चा में आ गया है। इटखोरी प्रखंड के अंतर्गत करनी गांव स्थित ऐतिहासिक बामणी तालाब के सौंदर्यीकरण और खुदाई के दौरान लगभग 1200 वर्ष पुरानी अत्यंत दुर्लभ प्राचीन प्रतिमा और कई नक्काशीदार पुरातात्विक अवशेष बरामद किए गए हैं।
इस अद्भुत और चमत्कारी पुरातात्विक खजाने के मिलने की सूचना जैसे ही फैली, पूरे इटखोरी क्षेत्र के ग्रामीणों और सनातन धर्मावलंबियों में भारी उत्साह और हर्ष का माहौल कायम हो गया। भगवान शिव और माता पार्वती की इस अलौकिक प्रतिमा के दर्शन और वंदना के लिए आस-पास के दर्जनों गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।
जेसीबी चालक की सजगता से सुरक्षित बची अमूल्य धरोहर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को करनी गांव के बामणी तालाब से जेसीबी मशीन एवं ट्रैक्टर के माध्यम से गाद और मिट्टी निकालने का कार्य प्रशासनिक स्तर पर चल रहा था। खुदाई के दौरान अचानक जेसीबी चालक की नजर मिट्टी के भीतर दबे एक काले चमकीले पत्थर की नक्काशी पर पड़ी। चालक की सूझबूझ और सजगता के कारण काम को तुरंत रोका गया।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि: तालाब की तलहटी से लगभग दो से तीन फीट नीचे पत्थरों के बीच से इस ढाई से तीन फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा और अद्भुत नक्काशीदार पत्थर को बेहद सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया।
तालाब से सुरक्षित बाहर निकालने के बाद प्रबुद्ध ग्रामीणों ने इस पावन प्रतिमा को पूरी मर्यादा के साथ साफ-स्वच्छ किया और वहीं समीप स्थित एक पवित्र पीपल के पेड़ के नीचे स्थापित कर सामूहिक पूजा-अर्चना और शंखध्वनि शुरू कर दी। स्थानीय जनमानस का अटूट विश्वास है कि इस पावन भूमि से साक्षात भगवान का प्रकट होना किसी बड़े ईश्वरीय चमत्कार से कम नहीं है।
प्रतिमा की अद्भुत बनावट: पालकालीन गौरवशाली इतिहास की गवाह
पुरातत्वविदों के अनुसार, इस विशिष्ट प्रतिमा की बनावट और नक्काशी भारतीय संस्कृति की महान विधा को प्रदर्शित करती है।
आलिंगन मुद्रा: प्रतिमा में भगवान भोलेनाथ एवं जगत जननी माता पार्वती को अत्यंत सुंदर आलिंगन मुद्रा (उमा-महेश्वर) में सजीव दर्शाया गया है।
वाहन अंकित: शिवजी के चरणों के नीचे उनके परम भक्त नंदी तथा माता पार्वती के पैरों के समीप उनके वाहन सिंह (शेर) की सुंदर आकृति अंकित है।
पारिवारिक संदेश: यह पूरी कलाकृति सनातन समाज के आदर्श पारिवारिक स्वरूप, अटूट सामंजस्य और असीम प्रेम का प्रतीक मानी जाती है।
गौर करने वाली बात यह है कि चतरा जिले के इटखोरी से लेकर मयूरहंड प्रखंड तक उमा-महेश्वर की ऐसी कई ऐतिहासिक प्रतिमाएं पुरातत्व विभाग द्वारा पहले ही चिन्हित की जा चुकी हैं, जो इस पूरे क्षेत्र की समृद्ध प्राचीन सभ्यता और पालकालीन गौरवशाली इतिहास को साबित करती हैं।
गांव में बनेगा भव्य ‘श्री उमा महेश्वर मंदिर’
करनी गांव के प्रबुद्ध ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है कि जिस पावन स्थल से यह प्रतिमा प्रकट हुई है, वहां जल्द ही समस्त सनातन धर्मावलंबियों के सहयोग से एक भव्य और दिव्य ‘श्री उमा महेश्वर मंदिर’ का निर्माण किया जाएगा और प्रतिमा की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इस पावन अवसर पर वर्तमान में समूचे प्रखंड क्षेत्र में उत्सव और भक्ति का माहौल बना हुआ है।





















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