एसडीओ, थाना प्रभारी और सीओ की प्रशासनिक इच्छाशक्ति से दूर हुई समस्या; एसी-पंखे चालू; 1575 फीट ऊंची पहाड़ी पर अब रोपवे निर्माण की मांग ने पकड़ा जोर
न्यूज स्केल लाइव
हंटरगंज (चतरा): चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड स्थित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रसिद्ध धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल मां कौलेश्वरी धाम से एक बेहद सुखद और बड़ी विकासात्मक खबर सामने आई है। लंबे समय से घोर बिजली संकट और अंधेरे की मार झेल रहे इस पावन मंदिर परिसर में वर्षों के इंतजार के बाद अंततः नियमित बिजली आपूर्ति पूरी तरह बहाल कर दी गई है।
बिजली आते ही मां कौलेश्वरी का पूरा दरबार और पहाड़ी क्षेत्र दूधिया रोशनी से जगमगा उठा है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की विधिक सुविधाओं के लिए लगाए गए एसी (AC), पंखे, आधुनिक लाइटें और अन्य महत्वपूर्ण विद्युत उपकरण अब सुचारू रूप से संचालित होने लगे हैं, जिससे तपती गर्मी में यहां पहुंचने वाले देश-विदेश के हजारों श्रद्धालुओं को बहुत बड़ी राहत मिली है।
प्रशासनिक और संयुक्त प्रयास रंग लाया, दूर हुई वर्षों की जानलेवा समस्या
धरातल से प्राप्त विवरण के अनुसार, कौलेश्वरी पहाड़ी पर निर्बाध बिजली बहाली सुनिश्चित करने की दिशा में चतरा जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मुख्य भूमिका निभाई है। इस पुनीत कार्य को धरातल पर उतारने का श्रेय मुख्य रूप से: जहूर आलम: माननीय अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), चतरा। प्रभात कुमार: हंटरगंज के थाना प्रभारी। ऋतिक कुमार: कौलेश्वरी विकास प्रबंधन समिति के सचिव सह अंचल अधिकारी (CO), हंटरगंज।
इन अधिकारियों ने बिजली विभाग के अभियंताओं के साथ समन्वय स्थापित कर दुर्गम पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों के बीच से सुरक्षा मानकों के तहत मंदिर तक हाई-वोल्टेज बिजली की लाइन पहुंचाई है। स्थानीय दुकानदारों और पुजारियों ने इस संयुक्त प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की है।
झारखंड के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है कौलेश्वरी धाम, अब हाईमास्ट लाइट लगाने की तैयारी
विदित हो कि मां कौलेश्वरी धाम झारखंड के सबसे प्रमुख और जागृत शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म का विधिक संगम है। शारदीय व चैत्र नवरात्र, पावन सावन मास, प्रत्येक पूर्णिमा और बसंत पंचमी जैसे बड़े धार्मिक अवसरों पर यहां बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश से हजारों-लाखों श्रद्धालु मत्था टेकने पहुंचते हैं।
अत्यंत ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां बिजली की समस्या दशकों से बनी हुई थी। गर्मी के मौसम में श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों, लाचार महिलाओं और मासूम बच्चों को उमस के कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ती थी। वहीं रात के समय पूरी पहाड़ी पर सन्नाटा और अंधेरा रहने से वन्य जीवों और सुरक्षा संबंधी संशय बने रहते थे। कौलेश्वरी विकास प्रबंधन समिति के सचिव ऋतिक कुमार ने बताया कि बिजली व्यवस्था सुचारू होने के बाद अब अगले चरण में मुख्य मंदिर परिसर, गर्भगृह, धर्मशाला, प्रतीक्षालय तथा पूरे सीढ़ी मार्ग पर हाईमास्ट लाइट लगाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
1575 फीट ऊंची पहाड़ी पर रोपवे निर्माण की मांग हुई तेज, पूर्व में हो चुका है सर्वेक्षण
नियमित बिजली आपूर्ति बहाल होने के साथ ही कौलेश्वरी धाम में बहुप्रतीक्षित रोपवे (Ropeway) निर्माण की मांग एक बार फिर बेहद तेज हो गई है। लगभग 1575 फीट ऊंची सुविख्यात पहाड़ी पर स्थित मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए वर्तमान में श्रद्धालुओं को सैकड़ों पत्थरों की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
शारीरिक रूप से कमजोर बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार श्रद्धालुओं के लिए यह सीधी चढ़ाई काफी कठिन साबित होती है। कई बार चढ़ाई के दौरान ऑक्सीजन की कमी से लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने और अचेत होने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यदि सरकार अविलंब रोपवे परियोजना को धरातल पर उतार देती है, तो श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी, पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा मिलेगा और पूरे हंटरगंज व चतरा क्षेत्र में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के सैकड़ों नए अवसर सृजित होंगे। सूत्रों के अनुसार, इस रोपवे परियोजना को लेकर पूर्व में तकनीकी सर्वेक्षण भी मुकम्मल किया जा चुका है, लेकिन फाइलें अब तक दबी हुई हैं। लोगों ने राज्य सरकार से इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर संज्ञान लेने की गुहार लगाई है।




















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