मुखिया की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में फूटा जनता का तीखा आक्रोश; पहली किस्त उठा चुके लोगों का सूची में दोबारा नाम आने पर मंचा बवाल; जियो-टैगिंग के नाम पर अवैध वसूली की उच्चस्तरीय जांच की मांग
न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो, सुधांशु शेखर
देवघर: देवघर जिले के देवीपुर प्रखंड अंतर्गत जितजोरी पंचायत सचिवालय में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-प्लस’ (PM Awas Plus) की सूची के विधिक सत्यापन को लेकर आयोजित विशेष ग्राम सभा भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक की भेंट चढ़ गई। इस ग्राम सभा के दौरान स्थानीय अंचल-प्रखंड प्रशासन और बिचौलियों के गठजोड़ के खिलाफ ग्रामीणों का कड़ा और अप्रत्याशित आक्रोश देखने को मिला।
ग्रामीणों ने सरेआम ग्राम सभा में हंगामा करते हुए पंचायत के कारिंदों और ब्लॉक कर्मियों पर मोटी रकम (रिश्वत) लेकर अमीर व अपात्र लोगों को आवास योजना का विधिक लाभ देने तथा अत्यंत गरीब व बेघर परिवारों को सूची से जानबूझकर बाहर रखने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
मुखिया सुभाष यादव की मौजूदगी में जनता ने खोली भ्रष्टाचार की पोल
न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो सुधांशु शेखर की धरातलीय रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वपूर्ण ग्राम सभा का आयोजन नियमानुसार जितजोरी पंचायत के मुखिया सुभाष यादव की अध्यक्षता में किया गया था। जैसे ही पंचायत सचिव द्वारा आवास प्लस के लाभुकों की सूची का पठन शुरू किया गया, वैसे ही सभा में उपस्थित सैकड़ों ग्रामीणों ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
ग्रामीणों ने सीधे तौर पर पंचायत और ब्लॉक के सर्वेक्षण कर्मियों पर आरोप लगाया कि जितजोरी पंचायत में बड़े पैमाने पर पैसे का खेल (लेती-देती) हुआ है। रिश्वत के बल पर ऐसे अमान्य और संपन्न लोगों को आवास आवंटित कर दिया गया है, जिनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद हैं।
पहली किस्त उठा चुके लोगों को दोबारा आवास, 2015 से भटक रहे असली हकदार
आक्रोशित ग्रामीणों ने ग्राम सभा में साक्ष्यों के साथ कुछ बेहद गंभीर और चौंकाने वाले विधिक खुलासे किए:
दोबारा आवास का आवंटन: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पंचायत में कई ऐसे रसूखदार लोग हैं, जिन्हें पिछली बार की योजना में बकायदा सरकारी आवास मिल चुका है और यहाँ तक कि वे सरकारी खजाने से आवास की पहली किस्त की विधिक राशि भी उठा चुके हैं। इसके बावजूद भ्रष्टाचार की बदौलत उनका नाम इस नई सूची में भी दोबारा शामिल कर लिया गया है।
पात्रों की अनदेखी: दूसरी तरफ, गांव के ऐसे अत्यंत लाचार और गरीब परिवार जो वर्ष 2015 से लगातार ब्लॉक और पंचायत कार्यालय का चक्कर काटकर लिखित आवेदन दे रहे हैं, उनका नाम आज तक सूची में शामिल नहीं किया गया।
जियो-टैग (Geo-Tag) के नाम पर हुई अवैध वसूली, रामपुर गांव की जांच की मांग
ग्रामीणों ने कड़े लहजे में अधिकारियों को अवगत कराया कि जितजोरी पंचायत के विभिन्न गांवों में गरीब लाभुकों के झोपड़े और जमीन का ‘जियो-टैग’ (भौगोलिक सत्यापन) करने के नाम पर कनीय तकनीकी कर्मियों और दलालों द्वारा बार-बार चक्कर लगाया गया। हर बार जियो-टैग करने के एवज में गरीब ग्रामीणों से अवैध रूप से पैसों की कड़ाई से वसूली की गई, लेकिन पैसे लेने के बाद भी उनका नाम फाइनल लिस्ट से गायब कर दिया गया।
इस घोर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता से त्रस्त होकर जितजोरी पंचायत के ग्रामीणों ने देवघर उपायुक्त (DC) और देवीपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) से लिखित अनुरोध किया है कि जितजोरी पंचायत के रामपुर गांव में एक विशेष स्वतंत्र टीम भेजकर पूरे आवास आवंटन और जियो-टैगिंग के खेल की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी कर्मियों पर विधिक चाबुक नहीं चला और अपात्रों के नाम सूची से नहीं काटे गए, तो वे प्रखंड मुख्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन को विवश होंगे।
ग्राम सभा के दौरान ये मुख्य लोग रहे उपस्थित
भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर हुई इस महा-ग्राम सभा के मौके पर मुख्य रूप से जितजोरी पंचायत के मुखिया सुभाष यादव, पंचायत सचिव एवं विभिन्न वार्डों के वार्ड सदस्य सहित रामपुर और आस-पास के गांवों से आए सैकड़ों की संख्या में पीड़ित ग्रामीण, महिला आंदोलनकारी और युवा उपस्थित थे। ग्रामीणों के इस कड़े रुख के बाद अब देखना होगा कि देवघर जिला प्रशासन इस हाई-प्रोफाइल आवास घोटाले पर क्या दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करता है।



















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