95 लाख का जीएसटी टैक्स सेटलमेंट करने के नाम पर मांग रहे थे घूस; सीबीआई की टीम ने 13 घंटे तक की छापेमारी, केमिकल टेस्ट में फंसे घूसखोर अधिकारी
झारखंड में सरकारी महकमों और केंद्रीय दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने एक और बहुत बड़ी और ऐतिहासिक दंडात्मक कार्रवाई की है। सीबीआई धनबाद (CBI Dhanbad) की विशेष एंटी-करप्शन विंग ने बुधवार को गिरिडीह स्थित सेंट्रल जीएसटी (CGST) कार्यालय में औचक छापेमारी की।
दफ्तर की चारों तरफ से घेराबंदी कर लगभग 13 घंटे तक चली इस हाई-प्रोफाइल छानबीन और गहन पूछताछ के बाद बुधवार की देर रात करीब 2:00 बजे सुपरिटेंडेंट बुद्धेश्वर सुंडी और इंस्पेक्टर बिरजू कुमार को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। गुरुवार की सुबह लगभग 3:00 बजे सीबीआई की टीम दोनों भ्रष्ट अधिकारियों को कड़े पहरे में अपने साथ धनबाद मुख्यालय ले गई है।
95 लाख का फर्जी टैक्स नोटिस; सीए और अधिकारियों ने बुना था जाल
इस हाई-प्रोफाइल रिश्वतकांड का खुलासा तब हुआ जब गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड अंतर्गत खाखीपीपर निवासी राजू अंसारी ने धनबाद जाकर सीबीआई से इसकी लिखित शिकायत की। राजू अंसारी ने सीबीआई को बताया था कि उन्हें गिरिडीह सेंट्रल जीएसटी विभाग की ओर से 95 लाख रुपये का जीएसटी टैक्स जमा करने का भारी-भरकम नोटिस भेजा गया था। विभाग द्वारा उन्हें एक के बाद एक लगातार तीन बार नोटिस जारी किए गए।
पीड़ित राजू अंसारी ने बताया कि लगातार नोटिस मिलने के बाद जब वे वस्तुस्थिति जानने गिरिडीह स्थित सेंट्रल जीएसटी कार्यालय पहुंचे, तो वहां की कड़ियों को देखकर उन्हें अपने साथ एक बहुत बड़ी धोखाधड़ी और साजिश होने का गहरा संदेह हुआ।
90 हजार की घूस मांगी, सीबीआई एसपी भंवर लाल मीणा के निर्देश पर तय हुआ जाल
आरोप है कि नोटिस से डरे पीड़ित को राहत देने के नाम पर संबंधित अधिकारियों और उनके निजी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) ने मामले को ‘सेटलमेंट’ (रफा-दफा) के जरिए हमेशा के लिए खत्म करने का प्रलोभन दिया। इसके एवज में पीड़ित राजू अंसारी से 90 हजार रुपये की घूस (रिश्वत) की मांग की गई। इस पूरे खेल में पीड़ित को अपने सीए, जीएसटी कार्यालय में पदस्थापित सुपरिटेंडेंट बुद्धेश्वर सुंडी तथा इंस्पेक्टर बिरजू कुमार की सीधी मिलीभगत की पुख्ता जानकारी मिली।
साजिश से परेशान होकर राजू अंसारी सीधे धनबाद स्थित सीबीआई कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की विस्तृत जानकारी सीबीआई के एसपी भंवर लाल मीणा को दी। सीबीआई एसपी के निर्देश पर एक गुप्त योजना (ट्रैप) तैयार की गई। रणनीति के तहत घूस की रकम कम कराने को लेकर अधिकारियों से दोबारा बातचीत की गई, जिसके बाद अंततः 65 हजार रुपये में सौदा तय हुआ।
केमिकल लगे नोटों का जाल; सुपरिटेंडेंट के घर से मंगवाई गई घूस की राशि
तय योजना के अनुसार, बुधवार के दिन ही राजू अंसारी घूस की पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये नकद लेकर गिरिडीह के सेंट्रल जीएसटी कार्यालय पहुंचा। यहाँ शातिर अधिकारियों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए सीधे अपने हाथ में पैसे लेने के बजाय दफ्तर में मौजूद किसी अन्य तीसरे व्यक्ति के माध्यम से रकम मंगवाई और उसे तुरंत सुपरिटेंडेंट के निजी आवास (घर) भिजवा दिया।
चूंकि सीबीआई ने पहले से ही उन नोटों पर अदृश्य फिनॉफ्थलीन केमिकल लगा रखा था, इसलिए जाल पूरी तरह बिछ चुका था। बुधवार सुबह तकरीबन 11:00 बजे सीबीआई के इंस्पेक्टर रघुनाथ कुमार के नेतृत्व में दर्जनों अधिकारियों की टीम ने जीएसटी कार्यालय में अचानक दबिश दी।
इसके बाद करीब 13 घंटे तक दोनों अधिकारियों को अलग-अलग कमरों में बैठाकर गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान जब सीबीआई का शिकंजा कसा और दबाव बढ़ा, तो सुपरिटेंडेंट बुद्धेश्वर सुंडी के घर से छुपाकर रखी गई घूस की राशि मंगवाई गई। इसके बाद जब दोनों अधिकारियों के हाथ केमिकल युक्त पानी में धुलवाए गए, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया। केमिकल टेस्ट में घूस लेने की पुष्टि होते ही जीएसटी सुपरिटेंडेंट बुद्धेश्वर सुंडी और इंस्पेक्टर बिरजू कुमार को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि सीबीआई के अधिकारियों ने ऑन-कैमरा कुछ भी बोलने से परहेज किया, लेकिन दोनों की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।






















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