विभिन्न जिलों के ब्राह्मण समाज को सैद्धांतिक व उद्देश्यात्मक रूप से एक सूत्र में जोड़ने का लिया गया संकल्प
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई।
समग्र ब्राह्मण मातृशक्ति परिषद् खैरागढ़-छुईखदान-गंडई की ओर से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें ब्राह्मण समाज की वैचारिक एकता, संगठन विस्तार और सनातन धर्म के संरक्षण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। परिषद की जिलाध्यक्ष डाली तिवारी एवं जिला प्रभारी उमा चौबे ने बैठक के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि संगठन द्वारा छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के स्थानीय ब्राह्मण समाज में सैद्धांतिक एवं उद्देश्यात्मक रूप से एकरूपता लाने के उद्देश्य से यह बैठक रखी गई थी।
बैठक की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई। उपस्थित सभी सामाजिक स्वजनों द्वारा दीपक प्रज्वलित कर भगवान श्री परशुराम जी का पंचोपचार पूजन किया गया। इस दौरान पूरे वातावरण में वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक भाव का संचार दिखाई दिया। कार्यक्रम में गंडई ब्राह्मण समाज की माताओं एवं बहनों ने रायपुर से पधारे समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि मंडल का तिलक लगाकर एवं पुष्पमाला अर्पित कर आत्मीय स्वागत किया।
बैठक में गंडई परिक्षेत्र ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं. गोपाल प्रसाद तिवारी, समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष डा. भावेश शुक्ला “पराशर”, प्रदेश संयोजक पं. रामानुज तिवारी, मातृशक्ति परिषद् प्रांत प्रमुख प्रमिला तिवारी, मातृशक्ति परिषद् जिलाध्यक्ष डाली तिवारी, जिला प्रभारी उमा चौबे, दुर्ग संभाग मीडिया प्रभारी नूपुर तिवारी सहित अनेक गणमान्य सामाजिक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। साथ ही पं. गौकरण शर्मा, पं. कमलेश दुबे सहित अन्य विद्वान जनों ने भी संगठनात्मक विषयों पर अपने विचार रखे।
सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में ब्राह्मण समाज के हित, उसकी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा तथा सनातन धर्म के संरक्षण के लिए सैद्धांतिक एवं वैचारिक रूप से एकजुट होने पर विशेष जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में समाज की मजबूती, जागरूकता और संगठनात्मक शक्ति ही आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित कर सकती है। इसलिए समग्र ब्राह्मण परिषद् के माध्यम से छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में एक समान सोच, समान दिशा और साझा कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संगठनात्मक रूप से होने वाले सभी सामाजिक कार्यों—जैसे सामूहिक विवाह, प्रतिभा सम्मान, धार्मिक अनुष्ठान, गुरुकुल/शिक्षा से जुड़े प्रयास, सेवा कार्य एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम—में आपसी सहमति, समन्वय और सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। वक्ताओं ने मातृशक्ति की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि घर-परिवार से लेकर समाज और संगठन तक, ब्राह्मण मातृशक्ति की सहभागिता से ही वास्तविक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम के दौरान समग्र ब्राह्मण मातृशक्ति परिषद् के भावी कार्यक्रमों एवं विस्तार योजना पर भी चर्चा हुई। स्थानीय स्तर पर युवा वर्ग को जोड़ने, संस्कार आधारित शिक्षा, नारी जागरण, नशा मुक्ति और सांस्कृतिक आयोजनों को गति देने के लिए कार्ययोजना बनाये जाने पर सहमति बनी। बैठक में उपस्थित मातृशक्ति एवं वरिष्ठजनों ने संगठन को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर कालिंदी उपाध्याय, सीमा दुबे, भारती शर्मा, संध्या उपाध्याय, प्रीति तिवारी, पं. श्रीकांत तिवारी, अंजू पांडेय, श्रीमती राखी तिवारी, आरती तिवारी, मृदुला त्रिपाठी, रूपा उपाध्याय, स्वाति शर्मा, शैल शर्मा, अंजू तिवारी, मीना तिवारी, श्याम तिवारी, गायत्री तिवारी, रेणु त्रिपाठी, अर्चना दुबे, विमला शर्मा, खुशबू शर्मा, शैल त्रिपाठी, रागिनी तिवारी, गीता शर्मा, संगीता तिवारी, पं. राकेश तिवारी, रानी तिवारी, पं. संगीत चौबे, टिकेश्वरी शर्मा, पं. नारायण शर्मा, पं. चंद्रमणि चौबे, पं. घनश्याम तिवारी, पं. धन्नू प्रसाद तिवारी, पं. नारद प्रसाद पांडेय, पं. साकेत दुबे, पं. त्रिपुरारी दुबे, पं. बालमुकुंद महाराज, पं. ओमकार तिवारी, पं. अमित शर्मा, पं. राजेंद्र तिवारी, पं. गिरीश प्रसाद शर्मा सहित बड़ी संख्या में सामाजिक स्वजन एवं ब्राह्मण बंधु उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर से समाज की एकता, संगठन की मजबूती और सनातन मूल्यों के संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।
बैठक का सफल संचालन पं. रमेश कुमार शर्मा द्वारा किया गया। अंत में आभार प्रदर्शन करते हुए संगठन पदाधिकारियों ने उपस्थित सभी मातृशक्ति, वरिष्ठजनों, अतिथियों और सामाजिक बंधुओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।




















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