चतरा में बाल विवाह रोकथाम पर प्रशासनिक लापरवाही, कानून दरकिनार, “1098 हेल्पलाइन पर शिकायत, फिर भी नाबालिग विवाह को वैध ठहराया गया”

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चतरा। जिले में बाल विवाह रोकथाम को लेकर प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाल ही में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दर्ज एक शिकायत में नाबालिग विवाह को बालिग घोषित कर देने का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे प्रकरण में जन्म प्रमाण पत्र और शैक्षणिक प्रमाण पत्र की विधिवत जांच किसी सक्षम पदाधिकारी द्वारा नहीं की गई। यह कार्रवाई न केवल बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 का उल्लंघन है, बल्कि झारखंड बाल विवाह प्रतिषेध नियमावली, 2015 के प्रावधानों के भी विपरीत है।


शिकायतकर्ता की पहचान सार्वजनिक – सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न

सूत्रों के अनुसार, शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति की पहचान को गोपनीय रखने के बजाय उसे सार्वजनिक कर दिया गया, जिससे लोग भविष्य में शिकायत करने से डरेंगे। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार शिकायतकर्ता की पहचान किसी भी स्थिति में उजागर नहीं की जा सकती, परंतु इस मामले में इसका उल्लंघन होता दिखा।


नियमों की अनदेखी, नाबालिग को बालिग ठहराने की कोशिश

जिले में बाल विवाह से जुड़े मामलों में यह भी सामने आया है कि नाबालिग को बालिग साबित करने के तरीके तक बताए जाते हैं। जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड जैसे प्राथमिक दस्तावेजों को मान्यता नहीं दी जाती, जो जांच प्रक्रिया पर गंभीर संदेह उत्पन्न करता है।


कानूनी प्रावधान स्पष्ट – परंतु पालन नहीं

बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006

  • लड़की की न्यूनतम वैवाहिक आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित।

  • नाबालिग विवाह अवैध और दंडनीय।

  • शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखना कानूनन अनिवार्य।

झारखंड बाल विवाह प्रतिषेध नियमावली, 2015

राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में जिला स्तर पर बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी की नियुक्ति का स्पष्ट प्रावधान है। इन्हें शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और जांच सुनिश्चित करनी होती है।

📌 मुख्य बिंदु

  • शिकायतकर्ता की पहचान उजागर → लोग शिकायत करने से डरते हैं
  • नियमों की अनदेखी → नाबालिग विवाह को वैध ठहराने के तरीके बताए जाते हैं
  • जांच में चूक → जन्म प्रमाण पत्र और शैक्षणिक प्रमाण पत्र को मान्यता नहीं दी जाती

🏢 जिम्मेदार संस्थाएं और भूमिकाएं

  • जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) → जिला स्तर पर निगरानी और रिपोर्टिंग
  • समाज कल्याण विभाग (DWCD&SS) → राज्य स्तर पर नीति निर्माण और अधिसूचना
  • चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) → प्रभावित बच्चों का संरक्षण और पुनर्वास
  • स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) → त्वरित जांच और कानूनी कार्रवाई
  • बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) → प्रखंड स्तर पर रोकथाम और हस्तक्षेप

📋 नियुक्त पदाधिकारी (राज्य से जिला स्तर तक)

स्तर पदाधिकारी जिम्मेदारी
राज्य स्तर समाज कल्याण विभाग के सचिव राज्य बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी
जिला स्तर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी जिला बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी
जिला बाल संरक्षण इकाई अधिकारी सहायक जिम्मेदारी शिकायतों पर निगरानी और रिपोर्टिंग
प्रखंड स्तर बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) स्थानीय स्तर पर रोकथाम और हस्तक्षेप

प्रशासनिक लापरवाही पर उठ रहे प्रश्न

चतरा जिले में बाल विवाह रोकथाम को लेकर बार-बार शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन आवश्यक सुधार नहीं किए गए।
जांच की प्रक्रिया कमजोर, दस्तावेजों की अनदेखी और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा में चूक—ये सभी संकेत देते हैं कि प्रणालीगत सुधार की तुरंत आवश्यकता है।

जिलावासियों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि बाल विवाह रोकथाम प्रणाली मजबूत हो सके।

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