राँची । ब्राह्मकुमरीज गांधीनगर सेवा केंद्र में ब्राह्मकुमरीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की 17 वीं पुण्यतिथि को विश्व वंन्धुत्व दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर ब्राह्मकुमारी सुरेखा बहन दादी जी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा अध्यात्म प्रज्ञा राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि एक ऐसी विदूषी सशक्त नारी का नाम है जिन्होंने सिद्ध किया कि नारी शक्ति स्वरूपा है। नारी में विद्यमान शक्ति को आध्यात्मिकता द्वारा पुनर्जागृत किया जाये तो वह समाज में महान क्रान्ति की नायिका बन सकती है। आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग द्वारा नारी ही शीतला, दुर्गा, सरस्वती और संतुष्टता की मणि सन्तोषी देवी बन सकती है, यह अपने जीवन में उन्होंने कर दिखाया। उन्होंने अपने नेतृत्व में भारत और विश्व के लगभग 145 देशों के लाखों भाई-बहनों के जीवन में अद्भुत परिवर्तन लाकर विश्व सेवा के लिए प्रेरित किया। अपने अनुपम मूल्यनिष्ठ जीवन, आध्यात्मिक शक्ति एवं प्रशासनिक दक्षता से ब्रह्माकुमारी संगठन में प्रेम, शान्ति, सत्यता, समरसता, सद्भावना, आत्मिक दृष्टि, वात्सल्य, करूणा जैसे जीवन मूल्यों को परमात्म शिक्षा और आत्मविश्वास से सुसज्जित किया।बीके देव भाई ने बताया शान्तिदूत दादी का कहना था एक बने नेक बने हम दादी जी के नेतृत्व में समाज में शान्ति, सद्भावना, धार्मिक समरसता भ्रातृत्व प्रेम जैसे मूल्यों की स्थापना की पवित्र और प्रकाशदयी व्यक्तित्व से लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन आया। इनके सानिध्य में लाखों परिवार पवित्र, तनाव एवं व्यस्नों से मुक्त, सुखी जीवन जीने की कला सीखकर अनेकों के लिए आदर्शमूर्त बने हैं।
दादी प्रकाशमणि की पुण्यतिथि को विश्व वंन्धुत्व दिवस के रूप में मनाया
By Anita Kumari
On: August 25, 2024 7:00 PM
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