
न्यूज स्केल टीम, श्रीकांत राणा/अरवींद कुमार
चतरा। भाजपा के गढ़ इटखोरी, मयूरहंड, पत्थलगड़ा व गिद्धौर प्रखंड में कांग्रेस सेंधमारी करने को बेताब है। ज्ञात हो कि इटखोरी तथा मयूरहंड प्रखंड में हुए लोकसभा चुनाव 1989 से ही भाजपा का गढ़ बना और उसी समय से भाजपा प्रत्याशी को झोली भरकर वोट मिलता रहा है। वर्ष 2019 में के लोकसभा के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को दोनों प्रखंडों से 66 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त हुए थे। इसके अलावे गिद्धौर व पत्थलगड़ा भी बीजेपी का गढ़ ही माना जाता है। लेकिन इस बार इन प्रखंडों में कांग्रेस पार्टी सेंधमारी करने को बेताब दिख रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि इटखोरी एवं मयूरहंड प्रखंड में बुंदेला राजपूत मतदाताओं की संख्या बेहतर है। साथ ही बुंदेला राजपूत मतदाता भाजपा के परंपरागत वोटर भी माने जाते रहे हैं। 1984 के लोस चुनाव तक बुंदेला राजपूत मतदाताओं का वोट कांग्रेस को ही मिलता था। लेकिन राम लहर में हुए 1989 के चुनाव में बुंदेला राजपूतों का वोट भाजपा का हो गया। 2000 के विस चुनाव को अपवाद मान ले तो अब तक हुए सभी लोकसभा व विधानसभा चुनाव में बुंदेला राजपूत मतदाता भाजपा को वोट करते आ रहे हैं। 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनाव में तो बुंदेला राजपूतों ने एक तरफा होकर भाजपा प्रत्याशी सुनील कुमार सिंह को वोट किया था। 2019 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी श्री सिंह को इटखोरी एवं मयूरहंड प्रखंड से 66 प्रतिशत से अधिक वोट मिला था। प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो इटखोरी व मयूरहंड प्रखंड में पड़े 55 हजार वोट में 40 हजार से अधिक वोट भाजपा प्रत्याशी को मिला था। शेष वोट का बंटवारा कांग्रेस, राजद व अन्य प्रत्याशियों ने किया था। यहां गौरतलब है कि भाजपा प्रत्याशी को मिले 66 प्रतिशत वोट में सर्वाधिक योगदान बुंदेला राजपूतों का था। वहीं इस बार इंडिया गठबंधन से कांग्रेस के प्रत्याशी केएन त्रिपाठी बुंदेला राजपूत मतदाताओं को भाजपा के प्रति रुझान को अपने पक्ष में करने के प्रयास में जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। जिसमें सूत्रों की माने तो लगभग सफल भी हो रहे हैं कांग्रेस प्रत्याशी श्री त्रिपाठी।
























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