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बरही में मनरेगा की सुस्त रफ्तार: 3,009 योजनाएं अधूरी, 1.56 करोड़ रुपये का सामग्री भुगतान वर्षों से लंबित

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जॉब कार्डधारियों को भी नहीं मिल रहा पर्याप्त रोजगार, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक किसी परिवार ने पूरे नहीं किए 125 दिन

बरही (हजारीबाग): ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और मजदूरों के पलायन पर रोक लगाने के उद्देश्य से संचालित मनरेगा योजना की बरही प्रखंड में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सरकारी आंकड़े प्रखंड में योजना के क्रियान्वयन की चुनौतियों को उजागर कर रहे हैं। प्रखंड की 20 पंचायतों में हजारों मजदूर रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वहीं फंड की कमी के कारण बड़ी संख्या में विकास योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। स्थिति यह है कि पांच वित्तीय वर्षों का सामग्री मद में करीब 1.56 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। दूसरी ओर, कुल 3,116 योजनाओं में से मात्र 107 योजनाएं ही पूरी हो सकी हैं, जबकि 3,009 योजनाएं अब भी अधूरी हैं।

प्रखंड में कुल 25,620 जॉब कार्ड जारी किए गए हैं। इनके माध्यम से 36,158 श्रमिक पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें केवल 8,220 जॉब कार्ड सक्रिय हैं। सक्रिय श्रमिकों की संख्या भी महज 9,072 बताई गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में दो नवंबर तक केवल 1,345 परिवारों के 1,434 लोगों को ही रोजगार मिल सका है। सबसे अहम बात यह है कि अब तक एक भी परिवार निर्धारित 125 दिनों का रोजगार पूरा नहीं कर पाया है। प्रति परिवार औसतन महज 13.48 दिनों का काम उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में ग्रामीण मजदूरों की आजीविका और रोजगार की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

3,009 योजनाएं अधूरी, अब तक सिर्फ 107 पूरी

मनरेगा के तहत बरही प्रखंड में योजनाओं की प्रगति भी धीमी है। नई और पुरानी लंबित योजनाओं को मिलाकर कुल 3,116 योजनाएं संचालित हैं। इनमें अब तक केवल 107 योजनाएं पूरी हुई हैं, जबकि 3,009 योजनाओं का काम अधूरा है। कृषि एवं कृषि आधारित कार्यों पर कुल खर्च का 87.80 प्रतिशत व्यय दर्शाया गया है। दो नवंबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 34.03 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें 29.84 लाख रुपये मजदूरी मद में भुगतान किए गए हैं। वहीं, मजदूरी भुगतान की 15 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी होने का प्रतिशत महज 10.31 है।

पांच वित्तीय वर्षों से 1.56 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित

योजनाओं के अधूरे रहने का एक बड़ा कारण सामग्री मद में राशि का भुगतान नहीं होना बताया जा रहा है। बीपीओ धर्मेंद्र कुमार के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 में 4.34 लाख रुपये, 2023-24 में 4.71 लाख रुपये, 2024-25 में 36.86 लाख रुपये, 2025-26 में 39.39 लाख रुपये तथा चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 71.07 लाख रुपये सामग्री मद में फंड के अभाव में लंबित हैं। इस तरह कुल करीब 1.56 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है।

राशि का भुगतान नहीं होने से पशु शेड समेत कई निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सामग्री मद की राशि नहीं मिलने के कारण योजनाओं को समय पर पूरा कराने में भी परेशानी हो रही है। इसका असर ग्रामीण विकास कार्यों की गति पर पड़ रहा है।

जल्द योजनाएं पूरी कराने का प्रयास : बीपीओ

इस संबंध में बीपीओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि प्रखंड में संचालित कुछ योजनाएं पंचवर्षीय और कुछ त्रिवार्षिक हैं। इनमें मुख्य रूप से आम बागवानी और दीदी बाड़ी योजना शामिल हैं। इन योजनाओं को जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में निर्धारित दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अभी समय शेष है। अधिक से अधिक मजदूरों को रोजगार का लाभ दिलाने और लंबित योजनाओं को पूरा कराने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।

हालांकि, उपलब्ध सरकारी आंकड़े बरही प्रखंड में मनरेगा के क्रियान्वयन की वास्तविक चुनौतियों को सामने रखते हैं। एक ओर बड़ी संख्या में जॉब कार्ड निष्क्रिय हैं, दूसरी ओर हजारों योजनाएं अधूरी पड़ी हैं। वहीं, सामग्री मद में करीब 1.56 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित रहने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण मजदूरों को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने और लंबित योजनाओं को पूरा करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

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