फसल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक किसान अंतर मिलन समारोह एवं ‘खेत बचाओ अभियान’ का आयोजन
26 अक्टूबर 2026 को लोहरदगा जिले के पेशरार प्रखंड अंतर्गत हेसाग पंचायत के फतेहपुर गांव में फसल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक किसान अंतर मिलन समारोह एवं ‘खेत बचाओ अभियान’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, फसल सुरक्षा, जल प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना और रबी फसल की खेती को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी श्रीमती कलेन खलखो, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के वैज्ञानिक धर्मा, केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, रांची की सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी प्यारी सांगा, PRADAN संस्था से गोल्डन कुमार राज, पेशरार प्रखंड की BTM एलिजाबेथ, ATM, हेसाग पंचायत के मुखिया, वार्ड सदस्य, ग्राम प्रधान एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–तिलहन (NMEO-OS) योजना के अंतर्गत सरसों बीज वितरण कर रबी फसल की शुरुआत की गई। इस पहल के तहत कुल 75 किसानों के बीच प्रति किसान 2 किलोग्राम की दर से सरसों बीज वितरित किया गया। इसका उद्देश्य किसानों को तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करना तथा सरसों उत्पादन को बढ़ावा देना है।
किसानों को फसल चक्र, फसल सुरक्षा एवं प्रबंधन, बीजोपचार तथा कीट एवं रोगों के वैज्ञानिक नियंत्रण के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही, प्राकृतिक खेती अपनाने, जैविक कृषि निवेश (इनपुट) तैयार करने तथा उनके उचित उपयोग के बारे में भी जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने और फसल नुकसान को कम करने के लिए वैज्ञानिक तरीकों के उपयोग पर जोर दिया।
कार्यक्रम में जल प्रबंधन एवं वर्षा जल संरक्षण पर भी विशेष चर्चा की गई। किसानों को वर्षा ऋतु में प्राप्त पानी को गांव में ही रोकने और उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त स्थलों के चयन के महत्व के बारे में बताया गया। इसके तहत डोभा, तालाब, चेक डैम एवं लूज बोल्डर संरचनाओं के निर्माण और उनके माध्यम से जल संरक्षण की संभावनाओं की जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, किसानों को सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए *प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC) योजना के अंतर्गत टपक सिंचाई*, सौर ऊर्जा आधारित पंप तथा कृषि सिंचाई के लिए कुसुम योजना (PM-KUSUM) एवं KSY से संबंधित प्रावधानों और संभावनाओं की जानकारी दी गई, ताकि उपलब्ध जल संसाधनों का कुशल उपयोग करते हुए खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।

इसके अतिरिक्त, विशेषज्ञों एवं कृषि विभाग की टीम ने फतेहपुर गांव में किसानों के खेतों का भ्रमण कर फसलों की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान अरहर की फसल में फूलों का रस चूसने वाले कीट की उपस्थिति देखी गई। किसानों को इस प्रकार के कीटों से फसल को होने वाले संभावित नुकसान, उनकी पहचान तथा प्रभावी रोकथाम एवं प्रबंधन के उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही, अरहर सहित अन्य फसलों में पाए जाने वाले प्रमुख कीटों की पहचान और उनके समेकित नाशीजीव प्रबंधन (IPM) के तरीकों पर भी चर्चा की गई।
इस पहल के माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने, रबी फसल की खेती को प्रोत्साहित करने, फसल नुकसान को कम करने तथा वर्षा जल संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम ने कृषि विभाग, कृषि वैज्ञानिकों, PRADAN संस्था एवं स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों के आपसी समन्वय से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




















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