कुलपति प्रो. डॉ. चन्द्र भूषण शर्मा ने प्रशिक्षुओं को बताया शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य
चतरा (झारखंड) संवाददाता | चतरा कॉलेज, चतरा के शिक्षा शास्त्र विभाग में सत्र 2026-28 के शुभारंभ के अवसर पर बुधवार को भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के कुलपति प्रो. डॉ. चन्द्र भूषण शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत विभागीय गरिमा एवं शैक्षणिक परंपरा के अनुरूप हुई। शिक्षा शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नन्द किशोर सिंह ने स्वागत भाषण सह विषय प्रवेश करते हुए मुख्य अतिथि, महाविद्यालय के प्राचार्य, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण एवं सभी प्रशिक्षुओं का स्वागत किया।

उन्होंने शिक्षा शास्त्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक-प्रशिक्षण केवल डिग्री हासिल करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, जिम्मेदार एवं आदर्श शिक्षक के निर्माण की यात्रा है। उन्होंने नए सत्र के प्रशिक्षुओं को विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। साथ ही कहा कि ज्ञान को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उसे व्यवहार, चिंतन और जीवन-मूल्यों में आत्मसात करने की आवश्यकता है।
शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को समझने का आह्वान
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. डॉ. चन्द्र भूषण शर्मा ने अपने संबोधन में प्रशिक्षुओं को शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराया। उन्होंने शिक्षक-प्रशिक्षण के दौरान ज्ञान के साथ-साथ जिम्मेदारी, अनुशासन और मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में पूर्व प्राचार्य डॉ. टी.एन. सिंह, डॉ. पाठक, चतरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार झा, महिला महाविद्यालय चतरा के प्राचार्य डॉ. बलदेव राम सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
प्रशिक्षुओं ने उत्साह के साथ संभाली व्यवस्थाएं
कार्यक्रम की सफलता में सत्र 2025-28 के प्रशिक्षुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी प्रशिक्षुओं ने उत्साह, अनुशासन एवं समर्पण के साथ कार्यक्रम की विभिन्न व्यवस्थाओं में सहभागिता की। कार्यक्रम का संयुक्त रूप से मंच संचालन प्रशिक्षु सुजीत कुमार, अभिषेक कुमार, अदिति पाठक एवं रीता अंजना लकड़ा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षा शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नन्द किशोर सिंह, प्रो. शोभा कुजूर, प्रो. प्रेम बसंत बाखला, डॉ. ग्लोरिया ग्रेस होरो, प्रो. अमित कुमार, डॉ. कंचन सोय मुरूम, डॉ. मुमताज अंसारी, डॉ. अशोक अभिषेक, सिसिलिया एवं छोटू हेम्ब्रम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



















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