एक स्वर, एक लय, एक समय—गूँजा वंदे मातरम्, जागी अखंड भारत की चेतना
नमामि भारतम्, वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से गूँजा लोहरदगा, 3916 लोगों ने एक साथ गाया राष्ट्रगीत
लोहरदगा। विद्या भारती, अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान, नई दिल्ली के आह्वान पर राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और अखंड राष्ट्रीय चेतना के भाव को सशक्त करने के उद्देश्य से शुक्रवार को लोहरदगा में “नमामि भारतम्, वंदे मातरम्” का सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रातः 11 बजे निर्धारित समय पर नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में बनाए गए 12 केंद्रों पर एक साथ “एक समय, एक स्वर, एक लय” में पूर्ण वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया।
इस ऐतिहासिक सामूहिक गायन कार्यक्रम का नेतृत्व शीला अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर, लोहरदगा द्वारा किया गया। विद्या मंदिर के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में कुल 3916 लोगों ने एक साथ राष्ट्रगीत का गायन कर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकात्मता का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न केंद्रों पर विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यालय परिवार, समाज के नागरिकों तथा संगठन के कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। निर्धारित समय पर अलग-अलग स्थानों से एक साथ गूंजे वंदे मातरम् के स्वर से पूरा वातावरण देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना से ओत-प्रोत हो उठा।
शीला अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में झारखंड प्रांत के प्रांत संचालक सच्चिदानंद लाल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इस दौरान विद्यालय परिवार एवं समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत का गायन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्र के प्रति श्रद्धा, मातृभूमि के प्रति समर्पण तथा समाज में एकता, अखंडता और राष्ट्रीय चेतना की भावना को और अधिक सुदृढ़ करना रहा। आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि भाषा, क्षेत्र और सामाजिक विविधताओं के बावजूद राष्ट्र के प्रति भाव और संकल्प एक हो तो राष्ट्रीय एकता का स्वर और अधिक प्रखर होता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शशिधर लाल अग्रवाल, उपाध्यक्ष विनोद राय, सचिव अजय प्रसाद, प्रधानाचार्य संजीव कुमार झा सहित विद्यालय के आचार्यगण, समाज के नागरिकों और संगठन के कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
सामूहिक गायन के माध्यम से उपस्थित लोगों ने यह संदेश दिया कि जब स्वर अनेक हों, लेकिन भाव एक हो और जब कदम अनेक हों, लेकिन दिशा एक हो, तब राष्ट्र की एकता और अखंडता का स्वर और अधिक सशक्त बनता है।
आयोजकों ने कहा कि “वंदे मातरम् केवल शब्द नहीं, बल्कि भारत की आत्मा से जुड़ा वह स्वर है, जो विविधता में एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जगाता है।” लोहरदगा में एक साथ 3916 लोगों द्वारा वंदे मातरम् का सामूहिक गायन इसी राष्ट्रीय भावना की अभिव्यक्ति बना





















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