विशेष पोक्सो अदालत का सख्त फैसला, 25 हजार रुपये जुर्माना भी
चाईबासा, पश्चिमी सिंहभूम। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के मामले में विशेष पोक्सो अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के आरोपी सोबेन सामड़ उर्फ डीबु सामड़ को दोषी ठहराते हुए 21 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
यह फैसला बुधवार को चाईबासा स्थित अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय संतोष आनंद की विशेष पोक्सो अदालत ने सुनाया। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी को कठोर सजा दी।
कुमारडूंगी थाना क्षेत्र का है मामला
मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के कुमारडूंगी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 11 जनवरी 2024 को नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म की घटना को लेकर तिरिलपी गांव के टोला कोटाचारा निवासी सोबेन सामड़ उर्फ डीबु सामड़ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कानूनी धाराओं और पोक्सो अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ दाखिल हुआ आरोप पत्र

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाया। जांच टीम ने संबंधित लोगों और गवाहों के बयान दर्ज किए तथा मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी अनुसंधान का हिस्सा बनाया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद मामले की न्यायिक सुनवाई शुरू हुई।
गवाहों और मेडिकल साक्ष्यों पर अदालत का भरोसा
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट तथा अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सोबेन सामड़ उर्फ डीबु सामड़ को दोषी माना।
अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उसे 21 वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश भी दिया गया है। अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में कठोर न्यायिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।





















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