कैबिनेट के फैसले से परीक्षा रद्द, आंदोलनकारी छात्रों में जश्न; नियुक्त अभ्यर्थियों ने फैसले के खिलाफ खोला मोर्चा
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट भवन में हुई झारखंड कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया गया। कैबिनेट की सहमति के बाद मुख्यमंत्री ने प्रेस वार्ता में इसकी आधिकारिक जानकारी दी। सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल सीजीएल ही नहीं, बल्कि टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित अन्य परीक्षाओं को भी रद्द किया जाएगा, चाहे उनकी चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीजीएल परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया गया होता तो ऐसी खामियां सामने नहीं आतीं। सरकार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुधार के लिए व्यापक कदम उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जेएसएससी और जेपीएससी में सुधार के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्व में उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। समिति प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधारों को लेकर अपनी सिफारिशें देगी।
एक फैसले ने दो खेमों में बांटा अभ्यर्थियों का दर्द

सरकार के फैसले के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे छात्रों ने भारी बारिश के बीच एक-दूसरे को गले लगाकर और मिठाइयां बांटकर फैसले का स्वागत किया। छात्र नेताओं ने इसे लंबे संघर्ष की पहली बड़ी जीत बताया।
हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों ने साफ कर दिया कि परीक्षा रद्द होना आंदोलन का अंतिम पड़ाव नहीं है। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने कहा कि उनकी प्राथमिक मांग मान ली गई है, लेकिन जब तक कथित परीक्षा धांधली की निष्पक्ष सीबीआई जांच का आदेश नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
छात्र नेता पीयूष कुमार ने भी इसे पहली जीत बताते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य विवादित मुद्दों और मांगों पर संघर्ष जारी रहेगा। वहीं अनशन की अगुवाई कर रहे देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि व्यवस्था में पारदर्शिता और व्यापक सुधार के लिए अभी लंबी कानूनी और रणनीतिक लड़ाई बाकी है।
नियुक्त अभ्यर्थियों ने फैसले पर जताई नाराजगी
दूसरी ओर, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में सफल होकर नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर इन अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि उनकी नियुक्तियां न्यायिक प्रक्रिया के बाद हुई थीं। उनका दावा है कि झारखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश के बाद नियुक्तियां हुईं और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया भी पूरी हुई थी।
प्रदर्शन कर रहे एक अभ्यर्थी ने भावुक होकर कहा कि कई युवाओं ने नौकरी पाने के लिए अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दी थीं। उन्होंने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। एक अन्य अभ्यर्थी ने कहा कि यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन सभी नियुक्त अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
अभ्यर्थियों ने मामले में दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। उनका कहना है कि वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं और अपने सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने को तैयार हैं।
सरकार के फैसले से बढ़ा कानूनी टकराव का रास्ता
जेएसएससी-सीजीएल को रद्द करने के फैसले ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर परीक्षा रद्द किए जाने को आंदोलनकारी छात्र निष्पक्षता की दिशा में बड़ी जीत बता रहे हैं, वहीं नियुक्त अभ्यर्थी इसे अपने भविष्य के साथ अन्याय करार दे रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा रद्द होने के बाद जांच का दायरा क्या होगा, दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी और पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सरकार क्या रास्ता अपनाएगी। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक आंदोलन के साथ-साथ न्यायिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है।
























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