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गुमला -लोहरदगा रोड , दुनदुरिया स्थित बी टी एल के पब्लिक स्कूल प्में पावन गुरुपूर्णिमा पर्व अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर स्कूली बच्चों ने अपने गुरुओं और शिक्षिकाओं के प्रति आदर भाव प्रकट करते हुए उन्हें सम्मानित किया।कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारा मधुर स्वर में की गई ‘गुरु वंदना’ से हुई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर महर्षि व्यास जी की जीवनी बतलाई गई। शिक्षिकाओं ने बच्चों को प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था और गुरुकुल परंपरा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बच्चों को बताया गया कि महर्षि व्यास प्राचीन काल के सबसे महान गुरुओं में से एक थे, जिन्होंने ज्ञान के प्रसार के लिए गुरुकुलों की स्थापना की थी। आज के समय में जिसे हम यूनिवर्सिटी (विश्वविद्यालय) कहते हैं, प्राचीन काल में उसे ही गुरुकुल कहा जाता था।महर्षि वेदव्यास जी की अमर कृतियों के बारे में भी बच्चों को जानकारी दी गई ।
महर्षि वेदव्यास जी संस्कृत वांग्मय के सबसे महान रचनाकार और संकलनकर्ता माने जाते हैं। उन्होंने मानव जाति को ‘महाभारत’ जैसा विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य दिया, जिसके अंतर्गत ज्ञान और कर्म का अद्भुत उपदेश ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ समाहित है। इसके साथ ही उन्होंने सनातन धर्म के आधारभूत 18 पुराणों की रचना की और वेदों को चार स्पष्ट भागों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद) में विभाजित कर ज्ञान को सुलभ बनाया। ज्ञान और दर्शन का उनका यह विशाल भंडार आज भी पूरी दुनिया को सही मार्ग दिखाता है।इस प्रेरणादायक सत्र के बाद बच्चों ने महर्षि व्यास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके उपरांत, पारंपरिक रूप से बच्चों ने अपनी शिक्षिकाओं को तिलक लगाया और पुष्प भेंट कर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता और आभार प्रकट किया। नन्हे-मुन्ने बच्चों के इस आदरपूर्ण व्यवहार ने सभी शिक्षकों का मन मोह लिया।इस गरिमामयी उत्सव के अवसर पर विद्यालय की शिक्षिका प्रिया रंजन, पल्लवी साहू, पल्लवी गोस्वामी, अनीता केशरी, आकांक्षा पाठक, सुमति कुमारी, सुमन, काजल सहित विद्यालय के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित थे।















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