JPSC-JSSC की CBI जांच की मांग, युवाओं के साथ अन्याय का लगाया आरोप
राज्य में लगातार सामने आ रही परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ हो रहा अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
झारखंड में परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कांग्रेस, झामुमो और इंडिया गठबंधन को निशाने पर लेते हुए कहा कि जो दल NEET मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वे झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधे हुए हैं।
रघुवर दास ने कहा कि झारखंड ने एक साथ नौ प्रतियोगी परीक्षाएं स्थगित करने का अनचाहा रिकॉर्ड बनाया है, जो राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ क्रूर मजाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में आयोजित क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा में कई अभ्यर्थियों को परीक्षा समाप्त होने के बाद प्रवेश पत्र डाउनलोड करने का लिंक मिला। वहीं संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में 40 से अधिक प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए।
उन्होंने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा का भी जिक्र करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दौड़ में 12 आदिवासी-मूलवासी युवाओं की मौत और सैकड़ों अभ्यर्थियों के घायल होने की घटना सरकार की गंभीर विफलता को दर्शाती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश की एक कथित ब्लैकलिस्टेड निजी एजेंसी (TDPL) को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनका कहना था कि इस एजेंसी को वर्ष 2025 में JSSC द्वारा भी ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। उन्होंने पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की।
रघुवर दास ने केंद्र सरकार के कदमों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बनाया गया है, जिसमें दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने NEET-UG की पुनर्परीक्षा पारदर्शी तरीके से आयोजित कर छात्रों का विश्वास बहाल करने का प्रयास किया है।
उन्होंने राज्य सरकार से उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान जान गंवाने वाले युवाओं के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। साथ ही प्रतियोगी छात्रों से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक उकसावे में न आएं और अपनी मांगों को शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से उठाएं।























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