अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, पशुधन की रक्षा और गांव की सुख-समृद्धि की कामना के साथ जुटे सैकड़ों ग्रामीण
गिद्धौर (चतरा)। गिद्धौर प्रखंड की सलगा पंचायत अंतर्गत सलगा गांव में शनिवार को पारंपरिक गांव गृही (आषाढ़ी पूजा) श्रद्धा एवं धार्मिक आस्था के साथ संपन्न हुई। इस दौरान ग्रामीणों ने कुंभरण एवं ग्राम देवी मंडप में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गांव की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, पशुधन की सुरक्षा तथा सभी ग्रामीणों के स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन की कामना की।
कुंभरण पुजारिया गिरधारी यादव ने बताया कि यह पूजा गांव की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। मान्यता है कि इस पूजा से खरीफ फसल की अच्छी उपज होती है, इसलिए प्रत्येक वर्ष सभी ग्रामीण एकजुट होकर ग्राम देवी मंडप, गंभेल एवं कुंभरण की सामूहिक पूजा करते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि यह परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और हर वर्ष नियमित रूप से आयोजित की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस पूजा से गांव में सुख-शांति बनी रहती है तथा प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों और अन्य संकटों से रक्षा होती है।
गांव के पुरोहितों एवं पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ग्राम देवता की पूजा-अर्चना कर सभी के कल्याण की प्रार्थना की। परंपरा के अनुसार इस अवसर पर बकरा बलि की प्रथा का भी पालन किया गया।
गांव के वरिष्ठ ग्रामीण रामदेव यादव एवं उमेश यादव ने बताया कि ग्रामीण अपनी श्रद्धा और इच्छा के अनुसार बकरा बलि अर्पित करते हैं। वहीं पूजा आयोजन के लिए प्रत्येक परिवार से बिरही (चंदा) एवं डलिया के रूप में सहयोग लिया जाता है, जिससे पूजा सामग्री एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं।
गांव के प्रमुख व्यक्ति कामाख्या सिंह ने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और गांव की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। इस अवसर पर गिरधारी यादव, रामदेव यादव, उमेश यादव, कामाख्या सिंह सहित सलगा गांव के सैकड़ों ग्रामीण श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना में शामिल हुए।























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