पंजीकरण, सुरक्षा मानकों और फीस व्यवस्था की नियमित समीक्षा पर जोर, विद्यार्थियों की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
हजारीबाग। चौपारण प्रखंड के बसरिया पंचायत में नामांकन और शुल्क को लेकर हाल ही में सामने आए विवाद के बाद हजारीबाग जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों की व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। इस घटनाक्रम के बाद जिलेभर के कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण, संचालन, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी की मांग जोर पकड़ने लगी है।
स्थानीय युवा चिंतक आलोक सोनी ने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र सेवा के साथ-साथ तेजी से व्यावसायिक स्वरूप भी ग्रहण कर रहा है। ऐसे में जिले में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का समय-समय पर निष्पक्ष निरीक्षण कराया जाना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों, अभिभावकों और संस्थानों—सभी के हित सुरक्षित रह सकें।
उन्होंने कहा कि कई अभिभावकों और विद्यार्थियों ने समय-समय पर कुछ कोचिंग संस्थानों में भवन क्षमता, पर्याप्त वेंटिलेशन, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई है। ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रशासनिक जांच जरूरी है।
आलोक सोनी के अनुसार, कोचिंग संस्थानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शिक्षण की गुणवत्ता, शिक्षकों की योग्यता, फीस संरचना और संचालन प्रणाली की भी नियमित समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण से भी जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार होटल, अस्पताल, विद्यालय, फैक्ट्री और अन्य सार्वजनिक संस्थानों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है, उसी प्रकार बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले कोचिंग संस्थानों का भी नियमित सत्यापन और निरीक्षण होना चाहिए। इससे नियमों का पालन सुनिश्चित होगा तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
आलोक सोनी ने देश में हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जुलाई 2024 में दिल्ली के एक कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में जलभराव से तीन यूपीएससी अभ्यर्थियों की मौत तथा लखनऊ में कोचिंग संस्थान में आग लगने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर परिणाम सामने रखे हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से सबक लेते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि हजारीबाग जिले के सभी कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण, भवन सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, फीस संरचना, शिक्षकों की योग्यता तथा अन्य लागू नियमों के अनुपालन की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। जहां भी अनियमितताएं पाई जाएं, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाए और नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को भी पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिले।























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