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मुखिया सस्पेंड: मनरेगा मजदूरी भुगतान के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप; वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां तत्काल प्रभाव से निलंबित

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बीडीओ की जांच रिपोर्ट में घूस लेने की पुष्टि, उपायुक्त का बड़ा एक्शन; उपमुखिया को सौंपे गए सारे अधिकार

न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो

चतरा (प्रतापपुर)। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए चतरा जिला प्रशासन ने एक बार फिर बड़ी और नजीर पेश करने वाली दंडात्मक कार्रवाई की है。 जिले के प्रतापपुर प्रखंड अंतर्गत टंडवा ग्राम पंचायत के मुखिया रामकेश्वर यादव उर्फ किशोर यादव के विरुद्ध मनरेगा मजदूरों के हक की मजदूरी भुगतान के एवज में अवैध रिश्वत (घूस) मांगने के गंभीर मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा हंटर चलाया है。

चतरा के जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त (DC) रवि आनंद ने आधिकारिक जांच प्रतिवेदन के आधार पर मुखिया रामकेश्वर यादव की वित्तीय (Financial) सहित तमाम प्रशासनिक शक्तियां तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दी हैं。 जिला मुख्यालय से जारी इस कड़े आदेश के बाद पूरे प्रतापपुर प्रखंड के भ्रष्ट जन-प्रतिनिधियों और बिचौलियों के बीच हड़कंप मच गया है。

मजदूरी भुगतान के लिए DSC बनवाने के नाम पर ली थी घूस, बीडीओ ने की पुष्टि

जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, टंडवा पंचायत में संचालित मनरेगा योजना के तहत गरीब मजदूरों की मजदूरी भुगतान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट) बनवाने के नाम पर मुखिया द्वारा अवैध रूप से पैसों की उगाही करने की गंभीर शिकायत जिला प्रशासन को मिली थी。 मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने इसकी विस्तृत और ऑन-स्पॉट जांच प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), प्रतापपुर से कराई थी。

प्रतापपुर बीडीओ द्वारा गहन विधिक जांच के बाद 9 मई 2026 को जिला मुख्यालय को जांच प्रतिवेदन (रिपोर्ट) सौंपा गया。 इस जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि मुखिया रामकेश्वर यादव ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन्होंने डीएससी बनवाने के नाम पर अवैध रूप से पैसे लिए थे。

स्पष्टीकरण का जवाब असंतोषजनक, अधिनियम की धारा 64(2) के तहत निलंबन

जांच में घूसखोरी की पुष्टि होने को जिला प्रशासन ने झारखंड पंचायती राज अधिनियम, 2001 की धारा 64 (2) का घोर विधिक उल्लंघन और मर्यादित पद का दुरुपयोग माना है。 इस संबंध में त्वरित विधिक प्रक्रिया के तहत जिला प्रशासन द्वारा आरोपी मुखिया से अपना पक्ष रखने के लिए शो-कॉज (स्पष्टीकरण) भी मांगा गया था。

परंतु, जिला प्रशासन ने मुखिया द्वारा समर्पित किए गए स्पष्टीकरण के जवाब को पूरी तरह से तथ्यहीन, असंतोषजनक और विधिक रूप से अस्वीकार्य पाया。 इसके पश्चात, ग्रामीण विकास विभाग (पंचायती राज), झारखंड सरकार के ज्ञापांक-2374 दिनांक 4 जुलाई 2017 के कड़े प्रावधानों के तहत त्वरित विधिक कार्रवाई करते हुए उपायुक्त ने मुखिया की सभी शक्तियों और वित्तीय अधिकारों को फ्रीज (निलंबित) कर दिया。

                  टंडवा मुखिया निलंबन मामला: एक नजर में
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│ निलंबित मुख्य आरोपी           │ रामकेश्वर यादव उर्फ किशोर यादव (मुखिया, टंडवा)│
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│ मुख्य वित्तीय अनियमितता       │ मनरेगा मजदूरी भुगतान व DSC के नाम पर रिश्वतखोरी│
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│ प्राथमिक जांच अधिकारी         │ प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), प्रतापपुर  │
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│ विधिक दंडात्मक आधार           │ झारखंड पंचायती राज अधिनियम, 2001 की धारा 64(2)│
├───────────────────────────────┼────────────────────────────────┤
│ नए प्रभार धारक (वित्तीय कमान) │ टंडवा पंचायत के उपमुखिया (धारा 73 के तहत)     │
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│ वर्तमान प्रशासनिक स्थिति       │ शक्तियां निलंबित, आदेश तत्काल प्रभाव से लागू│
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टंडवा के उपमुखिया को मिलीं सभी शक्तियां, बीडीओ को तामील कराने का निर्देश

टंडवा पंचायत में विकास कार्य और मनरेगा मजदूरों का दैनिक भुगतान बाधित न हो, इसके लिए उपायुक्त के आदेशानुसार वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था बहाल कर दी गई है。 झारखंड पंचायती राज अधिनियम, 2001 की धारा 73 (क) (2) के तहत अगले सरकारी आदेश तक टंडवा पंचायत के उपमुखिया को वित्तीय एवं अन्य सभी प्रशासनिक शक्तियां आधिकारिक रूप से प्रदान की गई हैं。

उपायुक्त ने इस कड़े प्रशासनिक आदेश की आधिकारिक प्रतिलिपि (Copy) आवश्यक अग्रतर विधिक कार्रवाई हेतु ग्रामीण विकास विभाग के सचिव, उप विकास आयुक्त (DDC), अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), जिला पंचायत राज पदाधिकारी (DPRO) तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रतापपुर को प्रेषित कर दी है。 प्रतापपुर बीडीओ को कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे इस निलंबन आदेश की भौतिक प्रति संबंधित मुखिया एवं उपमुखिया को ससमय तामील (Recieve) कराते हुए आगे की विधिक पंचायत कार्यपालिका सुनिश्चित कराएं。

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