अंचल में पदस्थापित राजस्व उप निरीक्षक की 5 वर्षों तक वेतनवृद्धि पर रोक, विभागीय जांच में प्रक्रियागत त्रुटि साबित
चतरा: सरकारी कार्यों में लापरवाही एवं विभागीय निर्देशों की अनदेखी पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, चतरा ने तत्कालीन राजस्व उप निरीक्षक एवं वर्तमान में हंटरगंज अंचल में पदस्थापित राजनन्दन चौधरी के विरुद्ध लंबित विभागीय कार्रवाई का निष्पादन करते हुए झारखंड सरकारी सेवक नियमावली, 2016 एवं संशोधित नियमावली, 2022 के तहत पाँच वर्षों तक असंचयात्मक प्रभाव से वेतनवृद्धि पर रोक का लघु दंड अधिरोपित किया है। हालांकि इस दंड का उनकी पेंशन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विभागीय अभिलेखों के अनुसार, राजनन्दन चौधरी पर टण्डवा अंचल अंतर्गत मौजा नईपारम में रैयती मान्यता से जुड़े मामलों में गलत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने, भूमि संबंधी प्रकरणों में आवश्यक तथ्यों एवं दस्तावेजों का समुचित परीक्षण नहीं करने तथा विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप जांच नहीं करने के आरोप लगे थे। इन आरोपों के आधार पर वर्ष 2021 में उन्हें निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी।
प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन में चेतावनी देकर कार्रवाई समाप्त करने का सुझाव दिया गया था, लेकिन उपायुक्त ने जांच प्रतिवेदन में पर्याप्त आधार एवं स्पष्ट साक्ष्यों का अभाव पाते हुए उससे असहमति जताई और मामले की पुनः जांच कराने का आदेश दिया। पुनः जांच के लिए अपर समाहर्ता को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया।
पुनः जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित प्रकरणों में किसी भी आवेदक को अनुचित लाभ अथवा मुआवजा प्राप्त नहीं हुआ। इसके बावजूद यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित कर्मी द्वारा गैरमजरूआ खास एवं जंगल-झाड़ी भूमि के सत्यापन में विभागीय निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक बिंदुओं का परीक्षण नहीं किया गया तथा केवल पंजी-02 के आधार पर अनुशंसा कर दी गई, जिसे कर्तव्य निर्वहन में गंभीर प्रक्रियागत त्रुटि माना गया।
संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेखों के सम्यक परीक्षण के बाद उपायुक्त ने झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के प्रावधानों के तहत पाँच वर्षों तक असंचयात्मक प्रभाव से वेतनवृद्धि पर रोक का दंड अधिरोपित करते हुए विभागीय कार्रवाई समाप्त करने का आदेश जारी किया।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में निर्धारित प्रक्रियाओं एवं विभागीय निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों की जिम्मेदारी है। नियमों की अनदेखी या प्रक्रियागत त्रुटि पाए जाने पर भविष्य में भी विधिसम्मत विभागीय कार्रवाई की जाएगी।




















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