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मिसाल: ग्रामीणों ने श्रमदान से बना डाली 3 किमी लंबी सड़क; निजी खर्च से चलाई जेसीबी और ट्रैक्टर

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सरकारी उपेक्षा और जनप्रतिधियों की उदासीनता से क्षुब्ध होकर ग्रामीणों ने उठाया कदम, कई किसानों ने दान में दी अपनी निजी जमीन

न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो

चतरा (पत्थलगड़ा)। “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।” इस कहावत को चतरा जिले के पत्थलगड़ा प्रखंड अंतर्गत नावाडीह गांव के ग्रामीणों ने पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है। सरकारी सिस्टम की घोर उपेक्षा और स्थानीय जनप्रतिधियों की लगातार बनी उदासीनता से तंग आकर नावाडीह पंचायत के गोवरदाहिया स्थित मुख्य पथ से चिंगीटांड़ तक ग्रामीणों ने सामूहिक इच्छाशक्ति और श्रमदान के बल पर तीन किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कर डाला है। ग्रामीणों के इस ऐतिहासिक और साहसिक कदम की पूरे जिले में खूब चर्चा हो रही है।

खेतों की पगडंडियों और दलदल से मिली मुक्ति, मरीजों को पहुंचाने में होती थी आफत

ज्ञात हो कि गोवरदाहिया मुख्य पथ से चिंगीटांड़ तक आजादी के इतने दशकों बाद भी आवागमन के लिए कोई स्थायी सड़क उपलब्ध नहीं थी। गांव के लोग सालों से खेतों की संकीर्ण पगडंडियों के सहारे अपने घरों और मुख्य बाजार तक आने-जाने को मजबूर थे।

यह स्थिति मानसून और बरसात के दिनों में और भी ज्यादा नारकीय व खौफनाक हो जाती थी, जब चारों तरफ दलदल पसर जाता था। पक्की या कच्ची सड़क नहीं होने के कारण सबसे विकट समस्या तब खड़ी होती थी जब गांव में कोई अचानक बीमार पड़ जाता था। प्रसव पीड़ा से तड़पती महिलाओं और गंभीर रोगियों को खाट (खटिया) पर लादकर मुख्य सड़क और अस्पताल तक पहुंचाने में ग्रामीणों के पसीने छूट जाते थे।

नेताओं के भरोसे बैठने के बजाय खुद उठाया कुदाल-गैंता, निजी खर्च से बुलाई जेसीबी

सालों-साल सिर्फ खोखले आश्वासन मिलने से क्षुब्ध ग्रामीणों ने आखिरकार खुद अपनी किस्मत बदलने का फैसला किया। गांव के प्रबुद्ध नागरिक उपेन्द्र चौहान, मनराज दांगी व वकील दांगी के कुशल नेतृत्व में दर्जनों की संख्या में ग्रामीण हाथ में कुदाल, गैंता और झोड़ी लेकर सुबह ही मैदान में उतर गए।

ग्रामीणों ने न केवल शारीरिक श्रमदान किया, बल्कि आपसी चंदा और निजी खर्च से ट्रैक्टर व जेसीबी (JCB) मशीन की व्यवस्था की, जिससे ऊबड़-खाबड़ रास्तों और झाड़ियों को समतल किया गया। इस महायज्ञ में गांव के कई बड़े दिल वाले किसानों ने दरियादिली दिखाते हुए सड़क के रास्ते में आने वाली अपनी कीमती निजी जमीन भी स्वेच्छा से दान में दे दी, ताकि गांव का विकास हो सके।

                  नावाडीह जन-श्रमदान: एक नजर में
┌───────────────────────────────┬────────────────────────────────┐
│ निर्माण पथ                     │ गोवरदहिया मुख्य पथ से चिंगीटांड़ │
├───────────────────────────────┼────────────────────────────────┤
│ सड़क की कुल लंबाई             │ 03 किलोमीटर (कच्ची सड़क)        │
├───────────────────────────────┼────────────────────────────────┤
│ मुख्य नेतृत्वकर्ता            │ उपेन्द्र चौहान, मनराज व वकील दांगी│
├───────────────────────────────┼────────────────────────────────┤
│ प्रयुक्त तकनीकी संसाधन       │ निजी खर्च से जेसीबी एवं ट्रैक्टर│
└───────────────────────────────┴────────────────────────────────┘

करोड़ों के बजट वाले मनरेगा और डीएमएफटी (DMFT) फंड पर करारा तमाचा

अचरज और ताज्जुब की बात यह है कि पत्थलगड़ा प्रखंड में वर्तमान में मनरेगा (MGNREGA), डीएमएफटी (DMFT) फंड, विधायक मद, सांसद मद और जिला परिषद निधि से कागजों पर करोड़ों रुपयों की योजनाओं का संचालन व क्रियान्वयन धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसके बावजूद एक पूरी आबादी को बुनियादी सड़क से महरूम रखा गया। ग्रामीणों का यह आत्मनिर्भर कदम सीधे तौर पर प्रशासनिक लचरता और ठेकेदारी प्रथा पर एक करारा तमाचा है।

इस ऐतिहासिक श्रमदान को धरातल पर उतारने वाले कर्मवीरों में मुख्य रूप से रामसेवक दांगी, धुपाल प्रसाद, दुखन महतो, प्रमेश्वर दांगी, बिखा महतो, मोती दांगी, रघुविर दागी, धनराज दांगी, राजदेव दागी, किशोर दागी, त्रिभुवन प्रसाद, आदित्य दांगी, तुलेश्वर दांगी, राजेश प्रसाद, राजेन्दर प्राद, विजय प्रषाद, दशरथ प्रसाद, सिखाराम प्रसाद, विनोद प्रसाद, राजकुमार दांगी, कृष्ण देव दांगी, रितुराज दांगी, जागो महतो, प्रविल दांगी, मनोज दांगी, विजय दांगी, सजय दांगी, सतोष दाँगी, रामदेव दांगी समेत सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष और युवा शामिल थे।

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