ट्रस्ट के अनुरोध पर लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरन शिवकुमार और नीलरतन कुमार की जांच टीम गठित; 7 दिनों में देनी होगी रिपोर्ट; आरोपी लवकुश मिश्रा और साला अनुकल्प हिरासत में; सीबीआई जांच के लिए हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल
देश की सबसे बड़ी आस्था के केंद्र अयोध्या स्थित भव्य श्री राम मंदिर के चढ़ावे (दान) की विधिक राशि में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी और वित्तीय अनियमितता का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। मंदिर के खजाने से लगभग 7 करोड़ रुपये की चोरी और घपले का दावा किए जाने के बाद इंटरनेट से लेकर राजनीतिक गलियारों तक भारी भूचाल आ गया है।
मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कड़ा विधिक रुख अख्तियार किया है। सीएम के कड़े आदेश पर पूरे मामले की परतों को उखाड़ने के लिए एक अत्यंत उच्चस्तरीय ‘विशेष जांच दल’ (SIT) का गठन कर दिया गया है। इधर, पुलिसिया जांच और छापेमारी के दौरान एक आरोपी कर्मचारी के घर से लाखों की नकदी बरामद होने के बाद इस पूरे विवाद ने भारी तूल पकड़ लिया है।
ट्रस्ट की गुहार पर कुछ ही घंटों में बनी 3 सीनियर अफसरों की कड़क SIT, शासन का सख्त अल्टीमेटम
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा वित्तीय गड़बड़ी की आशंका जताते हुए शासन से लिखित अनुरोध किया गया था। इस पर त्वरित विधिक कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने महज कुछ ही घंटों के भीतर तीन बेहद कड़क और सीनियर अधिकारियों की विशेष जांच टीम (SIT) को मैदान में उतार दिया है। इस हाई-प्रोफाइल जांच टीम में शामिल मुख्य प्रशासनिक चेहरे इस प्रकार हैं:
विजय विश्वास पंत (IAS, 2004 बैच): माननीय कमिश्नर, लखनऊ संभाग।
किरन शिवकुमार (IPS, 2008 बैच): माननीय पुलिस महानिरीक्षक (IG), लखनऊ रेंज।
नीलरतन कुमार (विशेष सचिव, वित्त): उत्तर प्रदेश फाइनेंस एंड अकाउंट्स सर्विस के 1986 बैच के अत्यंत कड़े व वरिष्ठ विधिक वित्त अधिकारी।
शासन की ओर से इस एसआईटी को बेहद कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। टीम को पूरे मामले की सघन स्क्रूटनी कर अपनी शुरुआती (प्रारंभिक) रिपोर्ट महज 7 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपनी होगी। वहीं, पूरे वित्तीय घालमेल की गहन पड़ताल के बाद अंतिम विधिक रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर जमा करनी होगी। यह समिति न केवल चोरी के इस दावे की वैज्ञानिक व फॉरेंसिक सच्चाई का पता लगाएगी, बल्कि भविष्य में राम मंदिर के चढ़ावे और बैंक अकाउंट्स में ऐसी कोई विरूपता न हो, इसके लिए एक अभेद्य विधिक गाइडलाइंस और पुख्ता सुझाव भी तैयार करेगी।
गोबर के ढेर में छिपाकर रखे थे चोरी के पैसे, नोट गिनने वाले कर्मचारी की खुली पोल
इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की कड़क छापेमारी के दौरान एक ऐसा चौंकाने वाला और घिनौना खुलासा हुआ है जिसने सबको सन्न कर दिया है। राम मंदिर के भीतर चढ़ावे की विधिक रकम को गिनने के काम में तैनात एक मुख्य संविदा कर्मी लवकुश मिश्रा (उम्र 27 वर्ष) के पैतृक आवास पर जब पुलिस ने दबिश दी, तो वहां से 10 लाख रुपये की भारी नगद राशि (कैश) बरामद की गई।
शातिर आरोपी लवकुश ने इस विधिक राशि को पुलिस और ट्रस्ट के अधिकारियों की नजरों से छिपाने के लिए अपने घर के समीप बने गोबर के ढेर के नीचे गड्ढा खोदकर दबा रखा था। इसके अलावा कुछ अन्य रकम घर के भीतर बक्से में भी छिपाकर रखी गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, लवकुश मुख्य रूप से दान पेटी के नोट गिनने वाले विधिक काउंटर पर तैनात था। फिलहाल पुलिस और तकनीकी सेल इस बात की गहनता से वैज्ञानिक जांच कर रही है कि बरामद किए गए ये नोट सीधे राम मंदिर के गर्भगृह और दान पेटी के हैं या कहीं और के।
ससुर की पैरवी पर मिली थी नौकरी, साले के साथ मिलकर रची घपले की साजिश
पुलिसिया अनुसंधान और बैकवर्ड लिंकेज खंगालने पर यह बात सामने आई है कि आरोपी लवकुश मिश्रा को राम मंदिर के भीतर यह अति संवेदनशील नौकरी उसके ससुर की मजबूत सिफारिश और पैरवी पर मिली थी। लवकुश का सगा साला अनुकल्प मिश्रा (उम्र 20 वर्ष) भी पहले से ही राम मंदिर के प्रशासनिक विंग में नौकरी कर रहा था।
पुलिस को कड़ा विधिक संदेह है कि इन दोनों जीजा-साले ने मिलकर ही नोटों की गिनती के दौरान दैनिक स्तर पर बड़ी रकम पार करने का यह घिनौना सिंडिकेट बनाया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लवकुश और उसके साले अनुकल्प दोनों को कड़ाई से हिरासत में ले लिया है और अज्ञात गुप्त स्थान पर दोनों से पूछताछ जारी है। अनुकल्प का परिवार अयोध्या के कौशलपुरी इलाके का रहने वाला है, जिनकी पैतृक संपत्तियों, बैंक खातों, आलीशान फार्म हाउस और वित्तीय लेन-देन की कड़क विधिक जांच अब इंटेलिजेंस और विंग विभाग द्वारा की जा रही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंची जंग, सीबीआई (CBI) जांच और कैग (CAG) ऑडिट की उठी मांग
राम मंदिर जैसे विश्व विख्यात और संवेदनशील धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला होने के कारण यह पूरा विवाद अब देश की विधिक चौखट तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में स्थानीय प्रबुद्ध अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा जनहित में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है।
इस याचिका में मुख्य रूप से यह विधिक गुहार लगाई गई है कि चूंकि मामला करोड़ों भक्तों की आस्था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। इसके साथ ही, याचिकाकर्ता ने राम मंदिर के चढ़ावे और ट्रस्ट के खातों का पूरा पारदर्शी ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से कराने की कड़क विधिक मांग की है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा इस जनहित याचिका को स्वीकार किए जाने की खबर है, जिस पर आगामी सप्ताह में कड़क सुनवाई होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।



















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