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बिरसा हरित ग्राम योजना का कमाल: 97 क्विंटल आम बेचकर आजीविका दीदियों ने कमाया ₹3 लाख; उपायुक्त की मुहिम लाई रंग

On: June 10, 2026 10:13 PM
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क्रेता-विक्रेता संवाद से किसानों को मिला सीधा बाजार, बिचौलियों का खेल खत्म; आजीविका कंपनी सहित 5 एफपीओ और 12 केंद्रों से हो रही है बिक्री; लंगड़ा, मालदा और आम्रपाली की धूम, डीपीएम बोले— ‘आगे और बढ़ेगा मॉडल’

न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो

चतरा: चतरा जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आम उत्पादक किसानों को सशक्त बनाने, उन्हें बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कर बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की आय में रिकॉर्ड वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन एवं झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) द्वारा किए जा रहे बड़े प्रयासों का अब बेहद शानदार और सकारात्मक परिणाम धरातल पर सामने आने लगा है।

चतरा उपायुक्त (DC) रवि आनंद के कुशल मार्गदर्शन और दूरदर्शी सोच के तहत आम उत्पादकों को सीधे संगठित बाजार से जोड़ने के लिए किए गए समन्वित प्रयासों के फलस्वरूप जिले में अब तक रिकॉर्ड लगभग 97 क्विंटल आम की सीधी बिक्री की जा चुकी है, जिससे शुरुआती दौर में ही करीब 3 लाख रुपये का भारी-भरकम कारोबार हुआ है।

5 महिला FPOs और 12 रिटेल बिक्री केंद्रों का नेटवर्क, बिरसा हरित ग्राम योजना को मिला बल

जिले में आम के इस बड़े व्यापारिक और आजीविका मॉडल को व्यवस्थित करने के लिए गंधरिया आजीविका महिला फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी सहित कुल 05 सक्रिय महिला किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) एवं 12 आधुनिक रिटेल बिक्री केंद्रों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से आम के वैज्ञानिक संग्रहण, विपणन (मार्केटिंग) एवं खुदरा बिक्री का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है।

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ के अंतर्गत चतरा के किसानों द्वारा उत्पादित उन्नत किस्म के आमों को एक संगठित और बड़ा बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जेएसएलपीएस की टीम ने स्थानीय किसानों, स्वयं सहायता समूहों और बड़े थोक खरीदारों के बीच एक बेहद मजबूत व पारदर्शी समन्वय स्थापित किया है।

उपायुक्त रवि आनंद का मास्टरस्ट्रोक: ‘क्रेता-विक्रेता संवाद’ से तय हुआ सही मूल्य

उल्लेखनीय है कि पूर्व में चतरा के सुदूर वन और ग्रामीण क्षेत्रों के सीधे-साधे किसानों को अपने बागानों के आमों के विपणन के लिए कोई बड़ा और पर्याप्त बाजार उपलब्ध नहीं हो पाता था। इस मजबूरी के कारण स्थानीय बिचौलिये और व्यापारी औने-पौने दामों पर किसानों से आम खरीद लेते थे, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।

इस शोषण को जड़ से समाप्त करने के लिए उपायुक्त रवि आनंद के कड़े निर्देशानुसार जिले में ‘आम क्रेता-विक्रेता संवाद कार्यक्रम’ का एक बड़ा आयोजन किया गया था। इस प्रशासनिक पहल के माध्यम से उत्पादक किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और राज्य व अंतरराज्यीय स्तर के बड़े फल खरीदारों के बीच सीधे आमने-सामने (प्रत्यक्ष) संवाद स्थापित कराया गया। इसी मास्टरस्ट्रोक का बेहद सकारात्मक और प्रत्यक्ष प्रभाव वर्तमान में चतरा के आमों के विपणन, ब्रांडिंग और धड़ल्ले से हो रही बिक्री पर साफ देखने को मिल रहा है।

लंगड़ा, मालदा और आम्रपाली का स्वाद, संग्रहण से पैकेजिंग तक आजीविका दीदियों का जलवा

आम के इस चालू सीजन में चतरा के बागानों से लंगड़ा, मालदा, हिमसागर, आम्रपाली सहित विभिन्न प्रसिद्ध स्थानीय एवं उन्नत संकर किस्मों के ताजे आमों को आजीविका दीदियों द्वारा सीधे किसानों के खेतों और बगीचों से संग्रहित कर मुख्य बाजारों व रिटेल काउंटरों तक सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है। इससे जहां एक तरफ गरीब किसानों को अपनी कड़ी मेहनत की उपज का ऑन-स्पॉट और बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ चतरा के आम उपभोक्ताओं को भी बिना किसी मिलावट और केमिकल के, बेहद ताजे व उच्च गुणवत्तापूर्ण आम बेहद किफायती दामों पर आसानी से उपलब्ध हो पा रहे हैं।

इस पूरी व्यापारिक गतिविधि में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRM) के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं और दीदियां अग्रिम मोर्चे पर डटी हुई हैं। महिलाएं पेड़ों से आमों के सुरक्षित संग्रहण (तोड़ने), गुणवत्ता के आधार पर उनकी कड़ाई से ग्रेडिंग, छंटाई, आकर्षक पैकेजिंग, सुरक्षित परिवहन (गाड़ियों से भेजने) एवं रिटेल काउंटरों पर सीधे बिक्री कार्यों में मुख्य और अत्यंत सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। चतरा की ग्रामीण महिलाओं के लिए जिला प्रशासन की यह अनूठी पहल इस भीषण गर्मी के मौसम में खेती के साथ-साथ अतिरिक्त और मोटी कमाई (आय) का एक बेहद मजबूत व स्थायी स्रोत बनकर उभरी है, जिससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को एक नया और ठोस बल मिला है।

ग्रामीणों को सशक्त करना और स्थानीय उत्पादों को ब्रांड बनाना प्राथमिकता: डीसी

चतरा के ग्रामीण विकास के इस सफल मॉडल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उपायुक्त रवि आनंद ने दो टूक शब्दों में कहा:

“चतरा जिले के सीमांत और गरीब किसानों को उनकी उपज का शत-प्रतिशत बेहतर व उचित मूल्य धरातल पर उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आजीविका के स्थायी, सम्मानजनक अवसरों से जोड़ना जिला प्रशासन की मुख्य और सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जिला प्रशासन जेएसएलपीएस के माध्यम से किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाकर चतरा के स्थानीय कृषि उत्पादों के विपणन और ब्रांडिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है, जिससे सीधे तौर पर किसानों की आय दोगुनी हो रही है और हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक अभूतपूर्व मजबूती मिल रही है।”

अधिक से अधिक महिला समूहों को मॉडल से जोड़ेगा जेएसएलपीएस: गौरव जायसवाल

इस संबंध में जेएसएलपीएस के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) चतरा, गौरव जायसवाल ने पूरी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी का मुख्य और मूल उद्देश्य ही ग्रामीण महिलाओं एवं वनों पर आश्रित किसानों को संगठित कर उन्हें स्थायी व मुनाफे वाले आजीविका के अवसरों से जोड़ना है।

उन्होंने बताया कि आम विपणन की यह क्रांतिकारी और पारदर्शी पहल किसानों को बिचौलियों से बचाकर सीधे बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों की दैनिक आय बढ़ाने में भी एक मील का पत्थर साबित हो रही है। डीपीएम ने दावा किया कि आने वाले समय में चतरा के इस सफल आजीविका मॉडल का जिला प्रशासन के सहयोग से और अधिक बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा, ताकि चतरा जिले के अधिक से अधिक दूरदराज के गरीब किसान और सुदूरवर्ती महिला समूह इस जनकल्याणकारी व्यवस्था से सीधे लाभान्वित होकर आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकें। चतरा की इस अनूठी सफलता की गूंज अब पूरे झारखंड के प्रशासनिक हलकों में सुनाई दे रही है।

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