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जीवन रक्षक 108 एंबुलेंस खुद पड़ी बीमार: महज दो टायरों के अभाव में महीनों से धूल फांक रही सरकारी गाड़ी; भगवान भरोसे मरीजों की जान

On: June 10, 2026 9:15 PM
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समय पर गाड़ी न मिलने से रास्ते में ही दम तोड़ रहे गंभीर मरीज; निजी वाहनों के लिए हजारों खर्च कर 40 किमी दूर चतरा जाने को मजबूर हैं ग्रामीण; प्रमुख प्रतिनिधि जयराम भारती का फूटा गुस्सा, सीएस और उपायुक्त से की कार्रवाई की मांग

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कुंदा (चतरा): चतरा जिले के सुदूरवर्ती और उग्रवाद प्रभावित कुंदा प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बेहद शर्मनाक और हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। दूसरों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर नया जीवन देने वाली सरकारी ‘108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा’ खुद बदहाली का शिकार होकर ‘बीमार’ पड़ी है।

कुंदा प्रखंड मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) परिसर के समीप लाखों रुपये की यह जीवन रक्षक एंबुलेंस महज नए टायरों के न होने के कारण पिछले कई महीनों से लावारिस हालत में खड़ी धूल फांक रही है। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से ठप होने के कारण सुदूर ग्रामीण इलाकों के गरीब मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा पा रहा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल गई है।

समय पर एंबुलेंस न मिलने से रास्ते में टूट रही सांसें, गरीबों की जेब पर डाका

स्थानीय ग्रामीणों और भुक्तभोगी परिजनों ने स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि प्रखंड में सरकारी एंबुलेंस बंद होने के कारण समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पा रही है। इसके कारण कई गंभीर मरीजों और बुजुर्गों की अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही तड़प-तड़प कर असमय मौत हो चुकी है।

हालात इतने बदतर हैं कि प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती महिलाएं, दिल का दौरा (हार्ट अटैक) से पीड़ित बुजुर्ग और सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल युवाओं को बचाने के लिए ग्रामीणों को भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ रही है। लोग निजी कमांडर या अन्य निजी वाहनों को महंगे दामों पर किराए पर बुक करने के लिए विवश हैं। इन निजी वाहनों के सहारे मरीजों को 30 से 40 किलोमीटर दूर ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए चतरा सदर अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक रूप से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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मेंटेनेंस के अभाव में कबाड़ बन रही सरकारी संपत्ति, गरीबों की जान से खिलवाड़: जयराम भारती

हैरानी की बात यह है कि प्रखंड स्तर से लेकर जिला स्तर के आला अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद महीनों से खड़ी इस गाड़ी को दुरुस्त कराने की सुध स्वास्थ्य विभाग के किसी जिम्मेदार अधिकारी ने नहीं ली है।

इस अमानवीय लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती पर कुंदा प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि जयराम भारती ने कार्यशैली पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करते हुए तीखा हमला बोला:

“राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर चमचमाती एंबुलेंस गाड़ियां उपलब्ध कराती है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों की घोर लापरवाही और मेंटेनेंस (रखरखाव) के अभाव में ये गाड़ियां कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। टायरों का न होना एक बहाना है, यह सीधे-सीधे कुंदा के गरीब आदिवासियों और ग्रामीणों की जान के साथ खेला जा रहा एक खतरनाक खेल है।”

सिविल सर्जन और उपायुक्त से अविलंब नए टायर लगवाने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

प्रमुख प्रतिनिधि जयराम भारती ने चतरा के सिविल सर्जन (CS) और उपायुक्त (DC) को लिखित आवेदन प्रेषित कर मांग की है कि इस जनहित के गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए अविलंब एंबुलेंस में नए टायर लगवाए जाएं और कुंदा प्रखंड में 108 आपातकालीन सेवा को चौबीस घंटे के भीतर बहाल किया जाए।

साथ ही उन्होंने मांग की है कि एंबुलेंस के मेंटेनेंस के लिए जिम्मेदार कनीय कर्मियों और स्वास्थ्य प्रबंधकों को चिन्हित कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सुदूरवर्ती वनों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली जनता की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं कभी भी बाधित न हो सकें। प्रबुद्ध नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द गाड़ी नहीं बदली गई या टायर नहीं लगे, तो कुंदा पीएचसी में तालाबंदी की जाएगी।

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