महज 15 दिन पहले मजदूरी करने सोलापुर गया था 40 वर्षीय युवक; धागा मिल फैक्ट्री के कूलर में आए करंट ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार; पीछे छोड़ गया बुजुर्ग माता-पिता, 5 बेटियां और 2 बेटे
न्यूज स्केल लाइव
हंटरगंज (चतरा): चतरा जिले के ग्रामीण इलाकों से रोजगार की तलाश में होने वाले पलायन की एक और बेहद दर्दनाक और मर्मस्पर्शी कहानी सामने आई है। हंटरगंज प्रखंड के वशिष्ठ नगर जोरी थाना क्षेत्र स्थित दंतार गांव के एक प्रवासी मजदूर की महाराष्ट्र के सोलापुर में मजदूरी करने के दौरान करंट की चपेट में आने से असमय मौत हो गई।
तमाम कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद रविवार की दोपहर करीब बारह बजे जैसे ही एम्बुलेंस से संतोष का शव उसके पैतृक गांव दंतार पहुंचा, पूरे इलाके में सन्नाटा और मातम पसर गया। मृतक के घर से उठने वाले परिजनों के करुण क्रंदन और चीख-चीत्कार को सुनकर सांत्वना देने पहुंचे हर एक ग्रामीण की आंखें नम हो गईं।
दोस्त को बचाने की कोशिश में खुद बन गया काल का ग्रास
प्राप्त जानकारी के अनुसार दंतार निवासी भुनेश्वर पासवान का 40 वर्षीय पुत्र संतोष पासवान घर की माली हालत ठीक न होने के कारण महज पंद्रह दिन पूर्व ही मजदूरी करने महाराष्ट्र गया था। परिजनों ने बताया कि शुक्रवार को वह महाराष्ट्र के सोलापुर में स्थित एक धागा मिल फैक्ट्री के भीतर रोजाना की तरह काम कर रहा था।
इसी दौरान वहां चल रहे एक लोहे के कूलर के बाहरी हिस्से में अचानक तेज करंट उतर आया, जिसकी चपेट में वहां काम कर रहा संतोष का एक अन्य मजदूर साथी आ गया। अपने साथी को तड़पता देख जब तक संतोष स्थिति की गंभीरता को समझ पाता, तब तक उसने बिना अपनी जान की परवाह किए सीधे अपने दोस्त को बचाने का प्रयास किया और आगे बढ़ गया। इस कोशिश में दोनों ही साथी करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। फैक्ट्री के अन्य मजदूरों ने आनन-फानन में दोनों को स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
परिवार का इकलौता सहारा था संतोष, सिर से उठा 7 बच्चों के पिता का साया
स्थानीय ग्रामीणों ने नम आंखों से बताया कि मृतक संतोष पासवान अपने दो भाइयों में सबसे बड़ा था और पूरे परिवार का एकमात्र मुख्य कमाने वाला सदस्य था। संतोष अपने पीछे एक भरा-पूरा लेकिन लाचार परिवार छोड़ गया है, जिसमें उसके बूढ़े माता-पिता के अलावा पांच बेटियां और दो छोटे बेटे शामिल हैं।
सात बच्चों के सिर से अचानक पिता का साया उठ जाने और घर के कमाऊ सदस्य की मौत से इस अत्यंत गरीब परिवार पर अचानक गहरा आर्थिक संकट और दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। माता-पिता बुजुर्ग होने के कारण शारीरिक रूप से काम करने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
स्थानीय स्तर पर रोजगार की ठोस व्यवस्था करे सरकार: ग्रामीण
इस मर्मस्पर्शी घटना के बाद दंतार गांव के ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों का गुस्सा और दर्द दोनों छलक उठा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, चतरा उपायुक्त और श्रम विभाग से अविलंब पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें आपदा कोष से पर्याप्त आर्थिक सहायता और सरकारी लाभ देने की पुरजोर मांग की है।
पलायन पर उठे सवाल: ग्रामीणों ने कहा कि चतरा जिले से हर साल हजारों मजदूर मजबूरी में दूसरे राज्यों का रुख करते हैं, जहां निजी फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण आए दिन हमारे जिले के युवाओं की मौतें हो रही हैं। वहां इन गरीब मजदूरों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती। ग्रामीणों ने झारखंड सरकार से मांग की है कि ग्रामीण इलाकों में ही मनरेगा और लघु उद्योगों के जरिए रोजगार की ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि रोटी की तलाश में किसी को घर न छोड़ना पड़े और ऐसे हादसों से बचा जा सके।




















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