दस्तावेजों में उम्र सीमा शेष होने के बाद भी जबरन हटाने का आरोप, पीड़िता ने उपायुक्त से लगाई न्याय की गुहार; केंद्रों के विकास मद और सामग्री खरीद में कमीशनखोरी की चर्चा तेज
न्यूज स्केल लाइव
इटखोरी (चतरा): चतरा जिले के इटखोरी प्रखंड अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र रजवार की सहायिका लीला सिन्हा का मामला अब केवल ड्यूटी बहाली तक सीमित नहीं रह गया है। इस पूरे प्रकरण ने अब महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्थानीय बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) कार्यालय की पूरी कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री/उपायुक्त के जनता दरबार में आवेदन देने के पांच दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से आहत पीड़िता ने एक बार फिर चतरा उपायुक्त (DC) रवि आनंद एवं विभाग के उच्चाधिकारियों से सीधे हस्तक्षेप कर निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
उम्र सीमा का पेच: ‘कागजों में नौकरी बाकी, तो मौखिक आदेश पर रोक क्यों?’
पीड़िता लीला सिन्हा का कहना है कि वे न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर काट रही हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उनका सीधा आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट विभागीय जांच और बिना किसी आधिकारिक लिखित आदेश के उन्हें तानाशाही रवैये से ड्यूटी से दूर रखा जा रहा है।
दस्तावेजों की जांच की चुनौती: पीड़िता ने साफ कहा कि यदि उनकी उम्र को लेकर विभाग या सीडीपीओ कार्यालय को कोई आपत्ति है, तो उनके सभी मूल दस्तावेजों की स्क्रूटनी कराई जाए। पीड़िता का दावा है कि नियुक्ति के समय विभाग में जमा किए गए उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र के अनुसार उनकी सेवा अवधि (Service Period) अभी बाकी है। इसके बावजूद उन्हें मौखिक रूप से यह कहकर ड्यूटी से रोका जा रहा है कि उनकी उम्र सेवा सीमा पार कर चुकी है।
कर्मियों का फूटा दर्द: विकास मद की राशि और सामग्री खरीद में बड़े खेल का आरोप
इस पूरे विवाद के बीच, इटखोरी प्रखंड के कई अन्य आंगनबाड़ी कर्मियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर सीडीपीओ कार्यालय और विभागीय कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। कर्मियों के आरोपों ने विभाग में चल रहे कथित सिंडिकेट की ओर इशारा किया है:
सालाना इंक्रीमेंट में कैश की मांग: कर्मियों का आरोप है कि मानदेय/वेतन वृद्धि के तहत प्रतिवर्ष मिलने वाली अतिरिक्त राशि के भुगतान के एवज में क्लस्टर स्तर पर कतिपय बिचौलियों या कर्मियों द्वारा अवैध रूप से नगद राशि (कमीशन) की मांग की जाती है, जिसे मजबूरी में देना पड़ता है।
खाते से पैसे निकालने का दबाव: कुछ कर्मियों ने चौंकाने वाला दावा किया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के विकास और आवश्यक सामग्री की खरीद के लिए विभाग द्वारा तय संवेदक या माध्यम से सामग्री सीधे केंद्र पर भेज दी जाती है। इसके बाद सेविका के खाते में विकास मद के तहत आई सरकारी राशि को नकद निकालकर ऊपर सौंपने का मौखिक दबाव बनाया जाता है।
पारदर्शिता का अभाव: कर्मियों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि के उपयोग को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है और केवल मौखिक अपेक्षाएं थोपी जाती हैं। हालांकि, इन गंभीर वित्तीय आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की उठी मांग
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इटखोरी प्रखंड की कई आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने अब लामबंद होते हुए यह मांग उठाई है कि केंद्रों में आने वाले विकास मद, सामग्री खरीद, वार्षिक वृद्धि राशि तथा अन्य सभी वित्तीय मदों के पिछले रिकॉर्ड की जांच के लिए जिला स्तर से एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच समिति (Independent Inquiry Committee) का गठन किया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यदि कोई कर्मचारी तकनीकी रूप से सेवानिवृत्त (Retire) होता है, तो उसे समय पर बकायदा स्पष्ट लिखित आदेश दिया जाता है। इस मामले में इटखोरी प्रशासन कई गंभीर सवालों के घेरे में है:
यदि सहायिका लीला सिन्हा की सेवा अवधि वास्तव में समाप्त हो चुकी है, तो विभाग ने अब तक उन्हें स्पष्ट लिखित आदेश क्यों उपलब्ध नहीं कराया?
अगर दस्तावेजों को लेकर कोई विसंगति है, तो जिला प्रशासन के निर्देश के बाद भी स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच से क्यों बचा जा रहा है?
आंगनबाड़ी केंद्रों के विकास मद और सामग्री खरीद में जबरन नकद वसूली और मौखिक दबाव के जो आरोप कर्मी लगा रहे हैं, उसकी जांच कौन करेगा?
क्या चतरा उपायुक्त इस पूरे सीडीपीओ महकमे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र विजिलेंस या तकनीकी जांच टीम गठित करेंगे?
फिलहाल यह पूरा मामला इटखोरी प्रखंड सहित चतरा जिले के प्रशासनिक हलकों में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना लाजमी होगा कि चतरा के संवेदनशील उपायुक्त रवि आनंद पीड़ित महिला की गुहार और सीडीपीओ कार्यालय पर लग रहे आरोपों पर क्या एक्शन लेते हैं।
















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