अनुसूचित जाति के गरीब परिवारों का फूटा गुस्सा, बोले अधिकारियों व नेताओं से लगाई गुहार पर नहीं मिला न्याय; बुजुर्ग की मौत के बाद अर्थी लेकर सड़क पर उतरे ग्रामीण
न्यूज स्केल लाइव
हंटरगंज (चतरा): चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड से एक ऐसा झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर स्थानीय व्यवस्था और मानवता को पूरी तरह शर्मसार कर दिया है। सोमवार को आवागमन का मुख्य रास्ता बंद किए जाने के खिलाफ आक्रोशित ग्रामीणों ने एक बुजुर्ग के शव को कंधे पर रखकर अनोखा और दर्दनाक विरोध प्रदर्शन किया। इस मर्मस्पर्शी घटना के बाद से ही पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक संवेदनहीनता को लेकर तीखी चर्चा शुरू हो गई है। ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए तत्काल रास्ते से अवैध कब्जा हटाने और न्याय देने की मांग की है।
पीएम श्री स्कूल तेतरिया की बाउंड्री से बंद हो रहा है रास्ता
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण रमेश पासवान, प्रमोद पासवान, इंद्रदेव पासवान, सुनील पासवान, विकास पासवान, विनोद भारती, आक्रोश भारती, जयराम भारती, गुड्डू कुमार, अजय भारती, सोमर भारती, राजेश भारती, सौरभ कुमार, सुरेंद्र कुमार, रंजीत कुमार भारती और रतन सिंह सहित अन्य ने रोते हुए अपना दर्द साझा किया।
ग्रामीणों ने बताया कि वे सभी अनुसूचित जाति (SC) के गरीब परिवारों से आते हैं और वर्षों से इसी रास्ते का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। उनके अनुसार, जब ‘पीएम श्री स्कूल तेतरिया’ का निर्माण हो रहा था, उस दौरान स्कूल के बीच से बस्ती तक आने-जाने के लिए एक आधिकारिक चकरोड (रास्ता) छोड़ा गया था। इसके साथ ही स्कूल के पीछे से भी एक वैकल्पिक रास्ता ग्रामीणों की सुविधा के लिए दिया गया था।
स्कूल प्रबंधन पर गड्ढे खोदने और दबंग पर अवैध कब्जे का आरोप
बस्ती के लोगों का आरोप है कि अब विद्यालय प्रबंधन समिति के द्वारा स्कूल की बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) के निर्माण के लिए जमीन पर गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं। इन गड्ढों के कारण अब इस मार्ग से पैदल चलना भी पूरी तरह दुर्लभ हो गया है। ग्रामीणों को डर है कि यदि यहाँ बाउंड्री वॉल खड़ी हो गई, तो उनकी पूरी बस्ती का मुख्य सड़क से संपर्क हमेशा के लिए कट जाएगा।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने गांव के ही एक रसूखदार व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने स्कूल के पीछे वाले चकरोड पर भी अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। इस दोहरी मार के कारण गांव का रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया है। स्थिति यह है कि रोजमर्रा के राशन-पानी के लिए आने-जाने में भारी फजीहत हो रही है और आपातकालीन स्थिति में कोई बाइक या एम्बुलेंस भी गांव के भीतर तक नहीं पहुंच पा रही है।
जब बुजुर्ग की मौत हुई, तो मजबूरी में अर्थी के साथ करना पड़ा प्रदर्शन
ग्रामीणों ने बेहद आक्रोशित लहजे में बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे पिछले कई महीनों से प्रखंड से लेकर जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लिखित शिकायत सौंप चुके हैं, लेकिन व्यवस्था की नींद नहीं खुली।
सोमवार को जब गांव के ही एक बुजुर्ग का देहांत हो गया, तो ग्रामीणों का धैर्य पूरी तरह जवाब दे गया। श्मशान घाट ले जाने के लिए रास्ता नहीं होने के कारण मजबूरन ग्रामीणों को कंधे पर शव (अर्थी) रखकर स्कूल और प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करना पड़ा।
ग्रामीणों का अल्टीमेटम: पीड़ित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जल्द से जल्द स्कूल के बीच से पूर्व में तय रास्ता खुलवाया जाए। यदि तकनीकी कारणों से वह संभव नहीं है, तो पीछे के चकरोड से अवैध कब्जा हटाकर ग्रामीणों को पक्का वैकल्पिक रास्ता दिया जाए, ताकि भविष्य में किसी लाचार परिवार को शव लेकर सड़क पर बैठने को मजबूर न होना पड़े।

















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