दियारा जा रही छोटी नाव तेज हवा के कारण डूबी, जिलाधिकारी, ग्रामीण एसपी और एसडीएम ने संभाला मोर्चा; पहले सब्जी लाने की होड़ और ओवरलोडिंग बनी हादसे की वजह, SDRF का रेस्क्यू जारी
बिहार की राजधानी पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत उमानाथ गंगा घाट पर गुरुवार की सुबह-सुबह एक बेहद ही विदारक और बड़ा नाव हादसा घटित हुआ है। उमानाथ गंगा घाट से कुल 14 लोगों को लेकर दियारा इलाके के लिए खुली एक छोटी नाव बीच गंगा नदी में तेज हवा और लहरों के थपेड़े के कारण असंतुलित होकर पलट गई।
इस भयावह जल-त्रासदी की सूचना मिलते ही पूरे बाढ़ अनुमंडल और पटना जिले के प्रशासनिक महकमे में भारी हड़कंप मच गया है। घाट पर स्थानीय ग्रामीणों और पीड़ित परिजनों की भारी भीड़ जुट गई है, जिससे चारों ओर चीख-पुकार और कोहराम का माहौल व्याप्त है।
स्थानीय नाविकों की तत्परता से बची 7 जिंदगियां; 3 के मिले शव
प्राप्त आधिकारिक और जमीनी विधिक जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह जब यह छोटी नाव उमानाथ गंगा घाट से खुली, तो नदी के बीच में अचानक मौसम का मिजाज बिगड़ गया। तेज हवाओं के कारण नाव डगमगाने लगी और देखते ही देखते गहरे पानी में समा गई। नाव डूबते ही घाट पर हड़कंप मच गया।
आसपास मौजूद स्थानीय साहसी नाविकों ने तुरंत अपनी तत्परता और मुस्तैदी दिखाते हुए नदी में छलांग लगा दी। नाविकों ने भारी मशक्कत कर डूब रहे 7 लोगों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया। इसके बाद प्रशासन द्वारा शुरू किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक महिला और एक युवक समेत कुल 3 लोगों के शवों को मृत अवस्था में नदी से बाहर निकाल लिया गया है। शेष 4 लापता लोगों की तलाश के लिए नदी में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
सब्जियों के लाखों के कारोबार की होड़; ओवरलोडिंग और लापरवाही का बड़ा खुलासा
न्यूज़ स्केल लाइव की ग्राउंड पड़ताल में इस हादसे के पीछे की एक बहुत बड़ी और कड़वी सच्चाई सामने आई है:
व्यस्ततम घाट और दियारा रूट: बाढ़ का उमानाथ गंगा घाट जिले के सबसे व्यस्ततम घाटों में से एक माना जाता है। यहाँ से प्रतिदिन लगभग 20 नावें दियारा इलाके के लिए रवाना होती हैं। इन नावों के माध्यम से हर दिन बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी दियारा पहुंचते हैं और वहाँ से सब्जियों की ढुलाई कर वापस मुख्य बाजार लौटते हैं। इस पूरे क्षेत्र में प्रतिदिन सब्जी के व्यापार से लाखों रुपये का कारोबार होता है।
क्षमता से अधिक भार: स्थानीय स्तर पर किसानों और सब्जी विक्रेताओं के बीच मंडी में सबसे पहले सब्जी लाने की एक अंधी होड़ लगी रहती है। इसी होड़ और जल्दबाजी के कारण नावों पर अक्सर क्षमता से अधिक लोग और बोरियां लाद दी जाती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस छोटी नाव में केवल 10 लोगों के बैठने की विधिक क्षमता थी, उस पर 14 से अधिक लोग सवार थे। प्रशासन की ओर से पर्याप्त नियंत्रण और सख्ती नहीं होने के कारण नाविक नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हैं।
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डीएम त्यागराजन और ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार पहुंचे घाट; जांच के कड़े निर्देश
हादसे की भयावहता और गंभीरता को देखते हुए पटना के जिलाधिकारी (DM) त्यागराजन और ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार तुरंत दलबल के साथ उमानाथ गंगा घाट पहुंचे। इससे पूर्व बाढ़ के थानाध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह, सीडीपीओ रामकृष्ण, एसडीएम गरिमा लोहिया और अंचलाधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय स्तर पर राहत कार्य शुरू कराया था।
अधिकारियों ने पटना से बुलाई गई राज्य आपदा रिस्पांस बल (SDRF) की मोटर बोट्स और गोताखोरों की टीम को रेस्क्यू कार्य में तेजी लाने का कड़ा निर्देश दिया है। जिलाधिकारी त्यागराजन ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद कड़े लहजे में कहा:
“यह बेहद दुःखद घटना है। प्रशासन की टीमें लापता लोगों को सुरक्षित ढूंढने के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। गंगा नदी में बिना आधिकारिक अनुमति, बिना लाइफ जैकेट और सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर अवैध रूप से चलाई जा रही सभी छोटी-बड़ी नावों पर अब कड़ा विधिक हंटर चलाया जाएगा। ओवरलोडिंग करने वाले नाविकों पर प्राथमिकी दर्ज कर नावों को जब्त किया जाएगा।”
फिलहाल उमानाथ गंगा घाट पर मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस प्रशासन की टीम प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षित बचे लोगों के विधिक बयान दर्ज कर रही है ताकि हादसे के वास्तविक कारणों की तकनीकी रिपोर्ट तैयार की जा सके। लापता लोगों की खोज के लिए एसडीआरएफ की टीमें लगातार नदी की लहरों को खंगाल रही हैं।






















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