दो दिनों तक कई घरों में नहीं जला चूल्हा, परिजन ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
चतरा (झारखंड), न्यूज स्केल संवाददाता : झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग प्रखंड क्षेत्र के लुटू और सोहावन गांव में टीएसपीसी के कथित सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोगता की मौत के बाद शोक का माहौल बना हुआ है। मंगलवार को करमा पर्व जैसे प्रमुख त्योहार पर भी दोनों गांवों में उत्सव नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में मातम का माहौल है और दो दिनों तक कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला।
ग्रामीणों का कहना है कि करमा पर्व के दौरान हर साल लुटू और सोहावन गांवों में विशेष उत्साह रहता था। दोनों गांवों में सामूहिक रूप से करमा पूजा का आयोजन लंबे समय से होता आया है। हालांकि, इस बार ब्रजेश गंझू की मौत के बाद ग्रामीणों ने पर्व नहीं मनाने का निर्णय लिया।
करमा का सामूहिक आयोजन इस बार रहा फीका
स्थानीय लोगों के अनुसार, लुटू और सोहावन में करमा पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी और पारंपरिक संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व रहा है। प्रखंड क्षेत्र में दोनों गांवों के करमा आयोजन की अलग पहचान रही है। ऐसे में इस बार पर्व के मौके पर भी सन्नाटा पसरा रहा। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि ब्रजेश गंझू को गांव और प्रखंड स्तर पर कई लोग एक सामान्य ग्रामीण के रूप में भी जानते थे। उनकी मौत की खबर के बाद क्षेत्र में शोक की स्थिति बनी हुई है।
मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल
ब्रजेश गंझू की वृद्ध मां टुकनी देवी और पत्नी उषा देवी का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है। परिजनों के अनुसार, दोनों लगातार न्याय की मांग कर रही हैं। उषा देवी ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि उनके पति को पुलिस ने पकड़ने के बाद मार दिया। यह परिवार की ओर से लगाया गया आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
परिजनों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की जांच नहीं हो जाती, तब तक वे न्याय के लिए आवाज उठाते रहेंगे। परिवार की ओर से न्यायालय और मानवाधिकार संस्थाओं के समक्ष भी मामला उठाने की बात कही गई है।
मुठभेड़ को लेकर अलग-अलग दावे
जानकारी के अनुसार, तीन दिन पहले उत्तर प्रदेश के रामनगर थाना क्षेत्र में एटीएस ने ब्रजेश गंझू को मुठभेड़ में मारे जाने का दावा किया था। वहीं, परिजनों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अलग दावा किया है और स्वतंत्र जांच की मांग की है। फिलहाल लावालौंग क्षेत्र के लुटू और सोहावन गांवों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित नजर आ रही हैं। ग्रामीण और परिजन अब मामले में होने वाली जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं।
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