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बी एस. कॉलेज में 1973 और 2026 की शिक्षक व्यवस्था का तुलनात्मक आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग

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बी.एस. कॉलेज में 1973 और 2026 की शिक्षक व्यवस्था का तुलनात्मक आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग

पूर्व छात्र नेता एवं युवा समाजसेवी रामाधार पाठक ने बी.एस. कॉलेज, लोहरदगा में शिक्षकों की वर्तमान स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1973 में कॉलेज में विभिन्न विषयों के लिए चयनित शिक्षकों की सूची उपलब्ध है। ऐसे में अब यह जानना बेहद जरूरी है कि 53 वर्ष बाद वर्ष 2026 में उन्हीं विषयों में कितने शिक्षक कार्यरत हैं, कितने पद स्वीकृत हैं और कितने पद रिक्त हैं।

रामाधर पाठक ने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी कॉलेज में विषयवार पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा परिणाम, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उनके भविष्य पर पड़ सकता है।उन्होंने कहा—“1973 की शिक्षक सूची और 2026 की वर्तमान स्थिति को सामने रखकर जनता के बीच तथ्य रखने चाहिए। 53 वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षा की जरूरत और विषयों का विस्तार हुआ है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि शिक्षक संख्या उसी अनुपात में बढ़ी है या नहीं।”पूर्व छात्र नेता एवं युवा समाजसेवी ने मांग की कि संबंधित कॉलेज एवं विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निम्नलिखित जानकारी सार्वजनिक की जाए—

1. 1973 में विषयवार कितने शिक्षक कार्यरत/चयनित थे।

2. 2026 में विषयवार कितने शिक्षक कार्यरत हैं।

3. प्रत्येक विषय में कितने पद स्वीकृत हैं।

4. कितने पद वर्तमान में रिक्त हैं।

5. रिक्त पदों को भरने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है।

6. शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है या नहीं, इसकी स्थिति स्पष्ट की जाए।

रामाधर पाठक ने कहा कि यह किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आरोप नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा सार्वजनिक मुद्दा है।

उन्होंने कहा—“अगर 53 साल बाद भी उच्च शिक्षा संस्थानों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, तो शिक्षा गर्त में नहीं जाएगी तो और क्या होगा? अब समय आ गया है कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर आंकड़ों के साथ जनता के सामने रखी जाए।”

उन्होंने कॉलेज प्रशासन, विश्वविद्यालय एवं संबंधित विभाग से विषयवार शिक्षक संख्या और रिक्त पदों का अद्यतन विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

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