NIA कोर्ट ने सुनाया फैसला, दोषियों को 8 से 10 साल की कैद और जुर्माना
चतरा/रांची। चतरा जिले के टंडवा स्थित मगध और आम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े बहुचर्चित टेरर फंडिंग मामले में रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में 12 दोषियों को 8 से 10 वर्ष तक की सजा सुनाई है। दोषियों पर 40 हजार से 90 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है।
अदालत के फैसले के अनुसार विनोद गंझू को 8 वर्ष, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम को 10 वर्ष, संजय जैन को 8 वर्ष, प्रेम विकास को 8 वर्ष और सुभान मियां को 8 वर्ष की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा मुनेश गंझू, बिरबल गंझू, बिंदु गंझू, मुकेश गंझू, भीखन गंझू, गोपाल सिंह भोक्ता और अनिश्चय गंझू को भी दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।
मामले में फैसला सुनाए जाने के दिन ही आम्रपाली परियोजना के सीसीएल महाप्रबंधक अजीत कुमार ठाकुर को रिहा कर दिया गया। वहीं आरोपी आक्रमण जी से संबंधित मामला अलग से चल रहा है।
टीपीसी को लेवी पहुंचाने का आरोप
एनआईए की जांच के अनुसार मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़े कोयला परिवहन और ठेके के माध्यम से प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी को लेवी एवं फंड पहुंचाए जाने का मामला सामने आया था। जांच एजेंसी के अनुसार कुछ आरोपी टीपीसी के सक्रिय सदस्य थे, जबकि कुछ पर संगठन के लिए लेवी वसूलने और फंड जुटाने में सहयोग करने का आरोप था।
जांच के दौरान एनआईए ने सीसीएल, पुलिस, उग्रवादियों और शांति समिति से जुड़े लोगों के बीच कथित सांठगांठ के जरिए टेरर फंडिंग नेटवर्क संचालित होने की बात सामने रखी थी। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि टीपीसी को लेवी देने के उद्देश्य से मगध और आम्रपाली परियोजनाओं में ऊंची दर पर कोयला ढुलाई का ठेका लिया गया था।
2018 में NIA ने संभाली थी जांच
टंडवा थाना में दर्ज कांड संख्या 2/2016 को एनआईए ने 13 फरवरी 2018 को अपने हाथ में लिया था। विस्तृत जांच के बाद एनआईए ने 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत में मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। अदालत के इस फैसले के बाद मगध-आम्रपाली कोल परियोजना से जुड़े चर्चित टेरर फंडिंग मामले में दोषियों पर कानूनी शिकंजा और कस गया है।




















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