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4 दर्जन बच्चों का रजिस्ट्रेशन डूबा, डीआरएस कॉलेज की मान्यता पर सवाल और डीएवी टंडवा में एडमिशन धांधली से फूटा गुस्सा

On: June 20, 2026 10:51 PM
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शिक्षा विभाग के 3 बड़े घपले: लापरवाही, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के सबूतों पर भी मूकदर्शक बने अधिकारी; उच्चस्तरीय जांच की मांग

न्यूज स्केल लाइव

चतरा (टंडवा)। सुदूरवर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ हो, इसके लिए सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। लेकिन चतरा जिले के टंडवा प्रखंड में शिक्षा विभाग से जुड़े तमाम विभागीय दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। टंडवा और आस-पास के क्षेत्रों में इस वर्ष शिक्षा विभाग से जुड़े तीन बेहद ही गंभीर और चौंकाने वाले मामले आम जनता के सामने आए हैं।

इन तीनों मामलों में घोर लापरवाही, वित्तीय अनियमितता, धोखाधड़ी और सीधे तौर पर भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत होने के बावजूद, जिला शिक्षा प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। अब तक की गई जांच महज ‘खानापूर्ति’ साबित हो रही है, जिससे स्थानीय अभिभावकों में भारी आक्रोश है।

मामला 1: सिसई स्कूल के प्रिंसिपल की सुस्ती से 4 दर्जन छात्रों का भविष्य अधर में

पहला गंभीर मामला सिसई स्कूल से जुड़ा है, जहाँ के प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) की आपराधिक सुस्ती और लापरवाही के कारण आठवीं कक्षा के लगभग चार दर्जन (48 से अधिक) विद्यार्थियों का परीक्षा पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) छूट गया।

झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) और शिक्षा विभाग के बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद संबंधित अधिकारी ने समय पर फॉर्म क्यों नहीं भरा, यह आज भी संदेह के घेरे में है। इस बड़ी लापरवाही के खिलाफ पीड़ित विद्यार्थियों और अभिभावकों ने प्रखंड से लेकर जिला स्तर के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत दी। लेकिन विडंबना देखिए कि हफ्तों बीत जाने के बाद भी दोषी प्रधानाध्यापक पर अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, जिससे अधिकारी के रसूख पर सवाल उठ रहे हैं।

मामला 2: डीआरएस कॉलेज हरदिया बांध की ‘मान्यता’ पर गहराया रहस्य; RTI का भी नहीं जवाब

दूसरा सनसनीखेज मामला टंडवा के हरदिया बांध में संचालित डीआरएस कॉलेज प्रबंधन का है। इस कथित कॉलेज द्वारा प्राथमिक विद्यालय से लेकर यूनिवर्सिटी (विश्वविद्यालय) स्तर तक की पढ़ाई एक ही बिल्डिंग में कराए जाने के दावों ने शिक्षाविदों और आम लोगों को हैरान कर दिया है।

जब सजग नागरिकों ने यूजीसी (UGC), संबंधित विश्वविद्यालय और विभिन्न एकेडमिक काउंसिलों की आधिकारिक ऑनलाइन वेबसाइटों को खंगाला, तो इस कथित कॉलेज का नामोनिशान कहीं नहीं मिला। मामले को कानूनी दायरे में लाने और ऑफलाइन स्तर पर साक्ष्य जुटाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज मांगे गए थे। विभागीय मिलीभगत के कारण तय समय पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके कारण वर्तमान में यह मामला प्रथम अपीलीय प्राधिकार के पास याचना के रूप में लंबित है।

डीएवी पब्लिक स्कूल में नामांकन को लेकर धांधली का आरोप, मामला गरमाया,

मामला 3: डीएवी पब्लिक स्कूल (NTPC) में व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर एडमिशन के नाम पर धोखाधड़ी!

हाल ही में एनटीपीसी (NTPC) परियोजना द्वारा संचालित प्रतिष्ठित डीएवी पब्लिक स्कूल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने विद्यार्थियों के नंबरों का जुगाड़ कर “डीएवी पब्लिक स्कूल इंग्रेस 11” नामक एक अनधिकृत व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। इस ग्रुप के माध्यम से झूठे तथ्य परोसकर और भ्रामक जानकारी देकर नामांकन के लिए अभिभावकों को गुमराह किया गया। जब कुछ जागरूक अभिभावकों ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, तो उनकी जमा राशि (एडमिशन/प्रक्रिया शुल्क) को स्कूल प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर हड़प लिया गया।

सबूत मिटाने की कोशिश:

स्थानीय मीडिया में इस धांधली की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद स्कूल प्रबंधन बैकफुट पर आ गया। अपने गुनाहों और डिजिटल सबूतों पर पर्दा डालने के लिए स्कूल प्रशासन ने आनन-फानन में उक्त व्हाट्सएप ग्रुप से दर्जनों सदस्यों को निष्कासित (Remove) कर दिया। इस आपराधिक धांधली के खिलाफ पीड़ित भुक्तभोगियों ने जिला प्रशासन, एनटीपीसी परियोजना प्रबंधन और डीएवी के केंद्रीय प्रबंधन (दिल्ली) को पत्र लिखकर निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच और दोषी प्रिंसिपल व उनके सहयोगियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

बड़ा सवाल: जिला शिक्षा अधिकारी क्यों साधे हुए हैं चुप्पी?

टंडवा क्षेत्र में एक के बाद एक सामने आ रहे इन तीनों घोटालों ने चतरा जिले की शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में पारदर्शिता और नैतिक दायित्वों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बहरहाल, अब पूरे जिले की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इन तमाम गंभीर और पुख्ता मामलों में अब तक बेहद शिथिल और उदासीन रवैया अपनाने वाले जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर रसूखदारों के दबाव में आकर इन फाइलों को हमेशा के लिए ठंडे बस्ते में दबा दिया जाता है।

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